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चलो फिर अजनबी हो जाते हैं

कहो तुम अगर आज फिर से वही बात करते हैं, मिटाकर यादें सारी ..फिर अनजान हो जाते हैं। देखकर भी करेंगे फिर अब अनदेखा एक दूसरे को, कोशिश फिर अजनबी बनने की आज करते हैं।। चलो तुम भी अब आँखे फेर लेना अगर मिलो कहीं, हम भी करेंगे कोशिश तुमसे नजरें चुराने की। वो दूर दूर से देखा करेंगे फिर एक दूजे को, चलो एकबार फिर अजनबी सा फिर मिलते हैं..।। वो तुझे देखकर दूर से वापिस कहीं और मुड़ जाना, न चाहकर भी तेरी सूरत से नजरें यूँ हटा लेना। चलो यार फिर वहीं एक बार फिर टकराते हैं, अजनबी सा बन किताबों को फिर गिराते हैं।। वो चिट्ठियों का सिलसिला फिर शुरू करेंगे, झुकी नजरों से बातें फिर बेहिसाब करेंगे। चलो फिर फूलों का वो दौर फिर दोहराते हैं, चलो वो सूखे गुलाब किताब से निकाल फ़ेंकते हैं।। ©®pari

आ अब लौट चलें

बेशक मुझे भृम थे बहुत, लेकिन अब हकीकत से वाकिफ हूँ, कुछ बातों से था मैं अनजान, आज वह भी जान चुका हूँ। कल तक करता था अहम बहुत, आज वापिस जमीं पर हूँ, दूसरे के भरोसे उड़ता था जो, आज ख़ुद की उड़ान भर रहा हूँ। तुम मुझे कुछ और समझ बैठे, मैं शायद कुछ और हो चला था। बेशक थोड़ा धीमी है मेरी चाल... लेकिन मैं कभी पीछे नहीं हटा था। तुम निकल चले हो कहीं दूर आज, मुझे मालूम है तुम्हे मेरा कोई ख्याल न रहा। मैं ही पागल था तेरी यादों में डूबा था जो.. तुम्हें तो बस एक ख्याल आसमा का ही रहा।। चलो अब हम भी फिर खुदगर्ज़ हो जाते हैं, छोड़ तेरी याद को आगे को बढ़ जाते हैं। जला दीं है हमने भी तमाम तस्वीरें तेरी, चलो किताब से अब वो गुलाब भी हटा देते हैं।। ©®pari

मिजाज शायराना

लब्ज अगर तुम कुछ कह जाते हो, उत्तरदायी उसके लिए फिर तुम हो जाते हो। वादा करना और फिर कर के तोड़ देना, इस आदत से तुम क्या नहीं घबराते हो...!! मेरे लब्जों को अगर समझ सको तो, उन बातों को तुम भी चिंतन में लाना। हर बार तुम्हें समझाऊंगा साथ बिठाकर, ऐसी गलतफहमी दिल से, pari तुम मत लगाना..!! बेशक ये वादियाँ खतरों से भरी हैं, लेकिन दिल को सुकूँ भी सिर्फ यही देती हैं। शहरों की चकाचौंध से अक्सर मन भर ही जाता है, ऐसे में सिर्फ देवभूमि उत्तराखंड का ही ख्याल आता है.. नजर फेरकर तलाश तेरी हम हर ओर करते हैं, है नजरों से कहीं दूर फिर भी तलाश भरपूर करते हैं। यूँहीं एकटक नहीं देखता होगा चकोर चांद को भी। तू है पास नहीं लेकिन तेरी तस्वीर को निहारते हैं।। चंद लम्हों की जिंदगी में हमे बस मुस्कुराना है होठों मे मुस्कान और रखा मिजाज शायराना है.. ©®Pari

ख्याल ख्याल में

जख्म थे हरे फिर भी मुस्कुरा रहे बेचैनी है बहुत दिखावा सुकूँ सा कर रहे। दिल मे मेरे एहसास तेरे लिए कुछ खास है, नजरो से तू दूर भले हो लेकिन दिल के बेहद पास है .. मेरी शब्दावली के बाग का, जैसे कोई सुंदर गुलाब हो तुम... मेरी कलम से लिखी.. जैसे कोई सहज किताब हो तुम। मैं लिख भी दूं इश्क़ कभी.. उस इश्क़ का जैसे ख़िताब हो तुम.. कुछ कहकर खामोश हो गये, जैसे कोई राज अधूरा कह गये। फिर किया वादा मुलाक़ात का, जैसे जानकर बात अधूरी कर गये। खुबसूरती से कह जाऊं मैं बात कोई, इल्म न हो किसी को भी उसका। मेरी कोशिशों में झुकाव दिखेगा, बस यही मेरी कलम का असर दिखेगा✍️ मन में थी मेरे कुछ बात, करनी थी जैसे कोई शुरुवात। सिलसिला फिर कुछ बदल गया, मन मे था जो मन में ही रह गया।। शुरुवात कहीं तो होनी थी, मन की बात कुछ सुनानी थी। फिर जैसा घनघोर अंधेरा छा गया, दिल की बात दिल मे बसा गया।। दिल मे कुछ अरमां जगे थे, बागों में ज्यों फूल खिले थे। कुछ बातें कहने को थी बाकी, कुछ संसय मिटने को थे बाकी... तुम भी कुछ रूठे लगते हो, बातों से कुछ झूठे लगते हो। होठों पर लिये मुस्कान कोई, दिल की बात दिल मे ही रखते हो✍️ कुछ बात रखी अनकही ह...

बस यही आरजू है तुझसे

न जाने क्यों ऐसा एहसास तूने पैदा किया, तनहा ही था रहना तो फिर क्यों दिल दिया। शिद्दत से चाहा जिसको भी जीवनकाल में, वही हर बार चोट कोई गहरी मुझे ही दे गया... मेरे जहन में है कई कई घाव ताजे अभी, मैंने छोड़ दी है करना अब मरहम पट्टी भी। अब तो हल्का हल्का सा दर्द भी रास आने लगा है, तेरा दिया हर दर्द जैसे तेरी याद बनने लगा है।। मुझे था यकीन की तुम मेरे हर फैसले में साथ दोगे, सोचा न था यूँ वादों से इतनी जल्दी मुहँ मोड़ लोगे। लेकिन अच्छा है समय से मैं भी संभल जाऊं अब फिर, छोड़ मोहब्बत गुमनाम सा खो जाऊं मैं भी अब फिर।। बहुत रो दिये तुम हे प्रिये मेरे लिये, बहुत दुःख तुमको मैंने हैं दे दिये। तुझसे बस अब एक और आरजू है, अगर तुम इतना कर सको मेरे लिये।  बेवजह न रोना अब कभी मेरे लिये. चाहे तन से निकल जाये प्राण मेरे भले..।। Pari✍️

बस युहीं फुरसत में

उलझनें बहुत है मन में, फिर भी दिल आस लिये बैठा है, तुम नहीं हो पास मेरे, फिर भी कोई उम्मीद किये बैठा है। मेरी कोशिशों को मुमकिन कर दे, ऐसी कोई बात कर जाना, मेरी ख्वाइश है एक ही, कयामत तक तुम मेरा साथ निभाना।। न कोई शिकवा है न की कोई शिकायत है, मिले तुझसा हर बार बस यही इक चाहत है। मेरी हर कोशिशों में खुशी तेरी झलकती है, हर पल मुस्कुराये तू बस दिल मे एक ही चाहत है...! हुस्न का दीदार जो तेरे हो जाये, ब्रह्मचारी भी गृहस्थी हो जाये... तेरे रूप में हो सराबोर एक बार, हर फ़िज़ा बस शराब हो जाये... तेरी खामोशियों को भी हम सुन लेते हैं, बिन कहे भी बात समझ लेते हैं... तू जो है बेचैन कहीं दूर हमसे आज फिर भी तेरी हर धड़कन सुन लेते हैं। तेरी खमोश आंखे, तेरा गुलाब से होंठ तेरी नटखट मुस्कान, तेरे गुलाबी गाल.. तेरी हर अदा है बेहद खूबसूरत.. तू है जैसे कोई सुहाना से ख्वाब जरा सी नादान है, जरा सी नटखट है, जरा सी बुद्धू है, जरा सी नखरेवाली है। जरा सी सीधी है, जरा सी नमकीन है, लेकिन दिल की साफ, मेरी प्यारी साली है... महीनों किया करते थे इंतज़ार, कुछ पल की मुलाकात को। हर पल करते थे बात खुद से, बस तेरे संग एक वाजि...

हकीकत बस यही थी....

होंठों पर मुस्कान रखी है, दिल का दर्द छुपा रहा हूँ, खामोशियां सजों रखी है, बस इंतज़ार कर रहा हूँ। यकीनन मेरी कोई बात, सुनी नहीं जायेगी जानता हूँ, बस इसी बात को लेकर, सब सुनते ही जा रहा हूँ। कितनी भी कोशिशें कर लूं, पर तुझे इल्म नहीं होगा, चाहे कोई भी गवाही दे दे, तुझे विश्वास नहीं होगा। सब कुछ जानकर भी मैं, तुझसे अनजान सा बना हूँ, न तुझे कद्र थी न होगी, फिर भी आस किये जा रहा हूँ। हर लम्हा बस बीत रहा है, ख्वाइशें सारी दफन हो चली, कभी थी मुझे भी तमन्ना कोई, सब जैसे स्वाहा हो चली। अब न कोई उम्मीद है, न दिल पर कोई असर होता है, न कोई खुशी अब हंसाती है, न कोई गम अब रुलाता है।। बेशक जहाँ में सब किराएदार है, फिर भी लगाव हो गया था, छोड़कर जाओगे मालूम था, फिर भी तुझसे प्यार हो गया था। तूने तो मुझे कराया था एहसास, कि अनजान है हम तेरे लिये, मैं ही नासमझ निकला, जो उम्मीद लगाये बैठा रहा तेरे लिये।। Pari