चलो फिर अजनबी हो जाते हैं

कहो तुम अगर आज फिर से वही बात करते हैं,

मिटाकर यादें सारी ..फिर अनजान हो जाते हैं।

देखकर भी करेंगे फिर अब अनदेखा एक दूसरे को,

कोशिश फिर अजनबी बनने की आज करते हैं।।


चलो तुम भी अब आँखे फेर लेना अगर मिलो कहीं,

हम भी करेंगे कोशिश तुमसे नजरें चुराने की।

वो दूर दूर से देखा करेंगे फिर एक दूजे को,

चलो एकबार फिर अजनबी सा फिर मिलते हैं..।।


वो तुझे देखकर दूर से वापिस कहीं और मुड़ जाना,

न चाहकर भी तेरी सूरत से नजरें यूँ हटा लेना।

चलो यार फिर वहीं एक बार फिर टकराते हैं,

अजनबी सा बन किताबों को फिर गिराते हैं।।


वो चिट्ठियों का सिलसिला फिर शुरू करेंगे,

झुकी नजरों से बातें फिर बेहिसाब करेंगे।

चलो फिर फूलों का वो दौर फिर दोहराते हैं,

चलो वो सूखे गुलाब किताब से निकाल फ़ेंकते हैं।।

©®pari

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