आ अब लौट चलें
बेशक मुझे भृम थे बहुत, लेकिन अब हकीकत से वाकिफ हूँ,
कुछ बातों से था मैं अनजान, आज वह भी जान चुका हूँ।
कल तक करता था अहम बहुत, आज वापिस जमीं पर हूँ,
दूसरे के भरोसे उड़ता था जो, आज ख़ुद की उड़ान भर रहा हूँ।
तुम मुझे कुछ और समझ बैठे,
मैं शायद कुछ और हो चला था।
बेशक थोड़ा धीमी है मेरी चाल...
लेकिन मैं कभी पीछे नहीं हटा था।
तुम निकल चले हो कहीं दूर आज,
मुझे मालूम है तुम्हे मेरा कोई ख्याल न रहा।
मैं ही पागल था तेरी यादों में डूबा था जो..
तुम्हें तो बस एक ख्याल आसमा का ही रहा।।
चलो अब हम भी फिर खुदगर्ज़ हो जाते हैं,
छोड़ तेरी याद को आगे को बढ़ जाते हैं।
जला दीं है हमने भी तमाम तस्वीरें तेरी,
चलो किताब से अब वो गुलाब भी हटा देते हैं।।
©®pari
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