मिजाज शायराना

लब्ज अगर तुम कुछ कह जाते हो,

उत्तरदायी उसके लिए फिर तुम हो जाते हो।

वादा करना और फिर कर के तोड़ देना,

इस आदत से तुम क्या नहीं घबराते हो...!!


मेरे लब्जों को अगर समझ सको तो,

उन बातों को तुम भी चिंतन में लाना।

हर बार तुम्हें समझाऊंगा साथ बिठाकर,

ऐसी गलतफहमी दिल से, pari तुम मत लगाना..!!


बेशक ये वादियाँ खतरों से भरी हैं,

लेकिन दिल को सुकूँ भी सिर्फ यही देती हैं।

शहरों की चकाचौंध से अक्सर मन भर ही जाता है,

ऐसे में सिर्फ देवभूमि उत्तराखंड का ही ख्याल आता है..


नजर फेरकर तलाश तेरी हम हर ओर करते हैं,

है नजरों से कहीं दूर फिर भी तलाश भरपूर करते हैं।

यूँहीं एकटक नहीं देखता होगा चकोर चांद को भी।

तू है पास नहीं लेकिन तेरी तस्वीर को निहारते हैं।।


चंद लम्हों की जिंदगी में हमे बस मुस्कुराना है

होठों मे मुस्कान और रखा मिजाज शायराना है..

©®Pari

Comments

Popular posts from this blog

कुछ कल्पनाओं के शहर

पहाड़ और पहाड़ी बचाओ

व्यथा आज पहाड़ की