बस युहीं फुरसत में
उलझनें बहुत है मन में, फिर भी दिल आस लिये बैठा है,
तुम नहीं हो पास मेरे, फिर भी कोई उम्मीद किये बैठा है।
मेरी कोशिशों को मुमकिन कर दे, ऐसी कोई बात कर जाना,
मेरी ख्वाइश है एक ही, कयामत तक तुम मेरा साथ निभाना।।
न कोई शिकवा है न की कोई शिकायत है,
मिले तुझसा हर बार बस यही इक चाहत है।
मेरी हर कोशिशों में खुशी तेरी झलकती है,
हर पल मुस्कुराये तू बस दिल मे एक ही चाहत है...!
हुस्न का दीदार जो तेरे हो जाये,
ब्रह्मचारी भी गृहस्थी हो जाये...
तेरे रूप में हो सराबोर एक बार,
हर फ़िज़ा बस शराब हो जाये...
तेरी खामोशियों को भी हम सुन लेते हैं,
बिन कहे भी बात समझ लेते हैं...
तू जो है बेचैन कहीं दूर हमसे आज
फिर भी तेरी हर धड़कन सुन लेते हैं।
तेरी खमोश आंखे, तेरा गुलाब से होंठ
तेरी नटखट मुस्कान, तेरे गुलाबी गाल..
तेरी हर अदा है बेहद खूबसूरत..
तू है जैसे कोई सुहाना से ख्वाब
जरा सी नादान है, जरा सी नटखट है,
जरा सी बुद्धू है, जरा सी नखरेवाली है।
जरा सी सीधी है, जरा सी नमकीन है,
लेकिन दिल की साफ, मेरी प्यारी साली है...
महीनों किया करते थे इंतज़ार,
कुछ पल की मुलाकात को।
हर पल करते थे बात खुद से,
बस तेरे संग एक वाजिब गुफ्तगू को.
यही वो वजह है ..जो लाती है हमे तुम्हारे पास..
क्योंकी खिले हुये चेहरे पर..
मुस्कान तुम्हारी है बेहद खास
न मुस्कान है होठों पे,
न आंखों में इंतज़ार..
दिल मे हैं अभी भी हम..
या फिर नहीं अब हमसे प्यार
पल पल रहती है कोशिश,
मुस्कुराहट बिखरने की..
न जाने कल फिर ये लम्हे,
मुस्कुराने दें भी या नही
शब्दों का है ज्ञान मुझे,
माना मैंने इस बात को..
फिर भी मन उत्सुक है रहता..
बस एक तेरी शुरुआत को...
एहसास ही तो है,
जो नाज़ुक सी डोर से जोड़ता है
बेवजह करता है इंतज़ार किसी का...
बस पल पल एक एहसास कराता है तेरा
तुझसे हुयी हर एक मुलाकात मुझे याद है,
तेरा मेरा हो साथ बस यही एक फरियाद है..
आखिरी बार जो छूटी है तुझसे मेरी बात,
लगता है जैसे वही थी मेरे इश्क़ की शुरूआत..
माना एक ही दिन बीता है हमारी मुलाकात को,
फिर से उत्सुक हो चला मन.. करने तुझसे बात को...
कुछ लम्हें जो बिन तेरे बिताये मैने,
जैसे बेवजह कोई सजा पाई हो मैंने...
बस यूहीं मैं कुछ किसी से कहता नहीं,
यकीन कर तेरे बिना मन कहीं लगता नहीं..
लाख कोशिश करूँ मैं दिल को मनाने की..
तेरे सिवा किसी और की ख्वाइश ये करता नहीं...
कुछ ही पल में तेरे साथ बिताया पल गुजर गया,
फिर लगा जैसे बरसात में पतझड़ आ गया...
तेरे बेबुनियाद इल्जामो को, हसकर सह रहा हूँ।
मैं लाख अच्छाई के बाद भी, बुरा ही बना हुआ हूँ,
तूने किये हैं लाखों गुनाह, फिर भी तेरा कोई कसूर नहीं।।
Pari✍️
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