ख्याल ख्याल में

जख्म थे हरे फिर भी मुस्कुरा रहे

बेचैनी है बहुत दिखावा सुकूँ सा कर रहे।


दिल मे मेरे एहसास तेरे लिए कुछ खास है,

नजरो से तू दूर भले हो लेकिन दिल के बेहद पास है ..


मेरी शब्दावली के बाग का,

जैसे कोई सुंदर गुलाब हो तुम...

मेरी कलम से लिखी..

जैसे कोई सहज किताब हो तुम।

मैं लिख भी दूं इश्क़ कभी..

उस इश्क़ का जैसे ख़िताब हो तुम..


कुछ कहकर खामोश हो गये,

जैसे कोई राज अधूरा कह गये।

फिर किया वादा मुलाक़ात का,

जैसे जानकर बात अधूरी कर गये।


खुबसूरती से कह जाऊं मैं बात कोई,

इल्म न हो किसी को भी उसका।

मेरी कोशिशों में झुकाव दिखेगा,

बस यही मेरी कलम का असर दिखेगा✍️


मन में थी मेरे कुछ बात,

करनी थी जैसे कोई शुरुवात।

सिलसिला फिर कुछ बदल गया,

मन मे था जो मन में ही रह गया।।


शुरुवात कहीं तो होनी थी,

मन की बात कुछ सुनानी थी।

फिर जैसा घनघोर अंधेरा छा गया,

दिल की बात दिल मे बसा गया।।


दिल मे कुछ अरमां जगे थे,

बागों में ज्यों फूल खिले थे।

कुछ बातें कहने को थी बाकी,

कुछ संसय मिटने को थे बाकी...


तुम भी कुछ रूठे लगते हो,

बातों से कुछ झूठे लगते हो।

होठों पर लिये मुस्कान कोई,

दिल की बात दिल मे ही रखते हो✍️


कुछ बात रखी अनकही हमसे उन्होंने खामोश होकर,

इससे ज्यादा और क्या कहते वो हमसे खामोश रहकर..✍🏻


खामोशी से जो कह जाते हो,

होंठों से वो बात निकली नहीं,

ऐसा क्या हुआ कभी फिर,

होंठों को फिर जो खोलीं नहीं🤔


इक सपना बुना था, कुछ धागे यादों के लेकर,

फिर कुछ पल बिताए नींद में, उन्हीं सपनो में खोकर।

सिलसिला कुछ ऐसा था कि नींद और सपने अधुरे रहे,

कुछ लम्हें थे दिल को पसंद जो, बस वही पास रहे...

✍🏻



लब्ज़ जो लिख दिये मैंने,

तरीफ जो कर दी इक रोज तेरी।

मुक्कमल मेरा जहां हो गया,

जो मुलाकात हो मेरी तेरी....😊


दिल की गहराईयों में डूबना है,

कुछ करीब तेरे हमे होना है।

मुलाकात भले न हो कभी अपनी,

एक एहसास दिल मे खास बनाना है..!!


थोड़ा नादान है लेकिन अच्छा है,

नटखट भला लेकिन सच्चा है।

दिल मेरा करे आरजू कोई जो पूरी न हो,

बेवकूफी नहीँ ये तो बस जैसे बच्चा है..


लिख भी दूँ मैं कोई ख्वाब अगर तुझे,

यकीनन वो पूरा न होगा पता है मुझे।

दिल चाहे कर ले लाख कोशिशें,

दीदार पल पल न होंगे आँखों तो तेरे..!!



मौसम फिर बदलने लगा, जैसे तुम्हारी दस्तक दे रहा,

कोहरा छाया है हर तरफ, बारिश जैसे कुछ गुनगुना रही.

बादलों से तेरी झलक जैसे देख रही हो यह हसीं नजारा।

मैं कर रहा इंतज़ार तेरा जैसे तुने मुझे हो पुकारा


झूठ के पुलिंदों से महल नहीं बनते,

रेत के टीलों पर कभी घर नहीं ठहरते।

स्वार्थ की दुनियाँ में बेवजह कुछ नहीं होता,

एहसासों से होती है पहचान Pari, अपने कभी दिखावा नहीं करते..


मैं किताबों में लिख भी दूँ कुछ शब्द यकीनन,

बिन किसी के पढ़े वो मुक़म्मल नहीं होंगे।

फिर कैसे कह दूं कि सब सही हो चला,

जब तक तुम हम से मुखातिब नहीं होते..!!


©®Pari


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