वजह मुस्कान की

बेवजह आयी है मुस्कान जो आज, क्या ये वही है जिसे मैं ढूंढ़ता हूँ,
न कोई आशा है मन मे आज शायद, बस एक अजीब सा सुकून है दिल मे।
कुछ अनकहे अनसुने सवाल थे, बिना जवाब ही आज खो चुके हैं,
जैसे छट चुका हो कोहरा दिलों से, मुस्कान संग एक नया सवेरा हुआ है।

नासमझ था जो आजतक मैं, बेवजह ही भटक रहा था अंधेरों में,
सामने था सुनहरा सवेरा जहां, मुहँ मोड़े खड़ा था कब से उसी ओर मैं।
कुछ अजब सा ख्याल आया आज, कुछ महर मेरे रब की हुयी होगी,
मुझे क्या था मालूम अंधेरा मिटेगा, और सामने मंजिल बाहें पसारे मिलेगी।

पल दो पल के इस जहाँ में, सभी है मुसाफिर कुछ ही पल के,
हर किसी को है जाना यहां से, मेहमान है सब कुछ पहर के।
रास्तों को भी पता है ऐ मुसाफिर, आज तू है कल कोई और होगा,
एक तेरे जाने के बाद यहां से, ना कोई तेरा फिर वजूद होगा।

आज है जो पास तेरे, बस वही तेरा अपना है जान ले,
कल तुझे छोड़ देगा वही जिसपर करता है तू नाज रे।
फिर भला क्यों सोचता है, सब छोड़ दे उस निराकार पे,
फिर ना कोई ख्वाइश बाकी रहेगी, बस होंठो पर मुस्कान होगी
Pari

© ® Pari....

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