मेरा जन्मस्थल, देवभूमि उत्तराखंड

सर्द हवाओं का होता है सिलसिला, मौसम एक सा रहता है हर जगह,
देवताओं का निवास है जहाँ, देवभूमि नाम से प्रसिद्ध है वह जगह।

प्रकृति का अनूठा है संगम, होते हैं यहाँ अक्सर चमत्कार,
चेहरों में मासूमियत है होती, रहता है दिलों में सबके प्यार।
दुनिया मे सब करते है भरोसा और रखते है सुलझा व्यवहार,
ऐसी है पहचान मेरी और ऐसी है मेरी जन्मभूमि मेरे यार।

जीवनदायनी गंगा का उदगम, है बद्रीविशाल का यहां निवास,
पार्वती संग भोलेबाबा नाम केदारनाथ करते है जहां वास,
नरसिंह, घंडियाल, भूम्या और भैरों देते शुभ आशिष,
नमन मेरा सदा देवभूमि तुझे, झुकता है मेरा तुझमें शीश।।

गौं गुठ्यार कांठा धार, रोज लगदन यख त्योहार
दयबतो कु वास यख, खोलयूं म गणेश अर भूमि मा भूम्याल।
बाराह मैना ऋतु बसंत, ऐजांद मुखड़ी मा मौल्यार,
ऐ जावा तुम भी बौड़ी दिदो, रखा पित्रो की धरोहर कु ख्याल
Pari

© ® Pari....


Love is life......Love is god....Love is everything....

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