औकात मेरी मुझसे ही

कुछ हुनर है अगर तुझ में, यकीनन कुछ बात मुझ में होगी,
खाली है आज हाथ तो क्या, कल लकीरें मेरी भी बदलेंगी।
राह जो पकड़ ली है आज मैने, कल मंजिल भी कदम चूमेगी,
उपहास बनाते है जो आज मेरा, वही भीड़ मेरी एक झलक को तरसेगी।।

कुछ ठाहाके जरूर लगेंगे कुछ बातें भी बनेंगी आज मेरी भी,
कुछ समझायेंगे नादान जानकर मुझे कुछ दूर तमासगीर होंगे।
रहेगी फिर भी एक टक मेरी, नजर बस गड़ी होंगी आसमा पर ही,
भले न अधिक शोहरत होगी यारो, लेकिन दूर से पहचान अलग होगी।।

राहत भी है और फिक्र भी लेकिन खुद पर है भरोसा भी आज,
हूँ अकेला आज तो क्या कल मुल्क भी करेगा मुझपे नाज।
होंगे जिक्र अपने भी किताबो में और तसवीर अखबार पर होगी,
क्यों रहें भीड़ का हिस्सा बन अगर कल अपनी अलग पहचान होगी।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything....

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