मेरी चाहत तुझसे ही

लिखना तो चाहता हूँ आज फिर से, लेकिन आज माहौल ठीक नहीं है,
माना थोड़ा गर्मी है मौसम में आज, लेकिन कलम की स्याही जमी हुयी है।
लाख कोशिश कर रहा हूँ पिरोने को शब्द आज फिर से,
न जाने फिर क्यूँ आज कोई धागा, नही पिरोता आज मेरे मोतियों को।

चाहत बहुत है आज भी, राहत भी है दिल मे तेरे प्यार से,
है सुकून तेरे पास होने का, डर है तो बस तेरे रोने से।
कुछ मोहब्बत जतानी बाकी थी, कुछ फसाने कहने बाकी हैं,
अभी तो सफर शुरू किया संग तेरे, मीलों की राह बाकी है।

मुस्कुराये बिन रह न पाऊँ, ऐसा भी कोई मर्ज नही मुझको,
बस कुछ सवाल है मन मे, जो मुस्कान को हटने नही देते।
होता है दर्द मुझको भी, रुलाते हैं घाव मुझको भी,
ईश्वर की है कोई कृपा जरूर, सम्भल जाता हूं जो गिरकर भी।

मेरी मोहब्बत नही बदलेगी, मेरी वफा नही बदलेगी,
जब तक है सांस मुझमे शोना, मेरी पसंद नही बदलेगी।
आने दो इन्तेहाँ कितने भी, मेरे जीवन की परिभाषा वही होगी,
आज कल और बरसों बाद भी, मेरे दिल के करीब बस तू होगी।।
pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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