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वो सब ढूंढते हैं तुझे

वो बूढ़ी आंखे खोजती है तुझे, वो कांपते हाथ सहारा चाहते हैं तेरा, वो कंपकपाते शब्द पूछते हैं, कहां है वो जो हुआ करता था मेरा। वो झुकी पीठ सहारा चाहती है, वो थके पांव आराम ढूंढते हैं, वो सूना आंगन, वो खाली क्यारियां, वो मील का पत्थर, वो गांव का बस स्टॉप..सब ढूंढते है तुझे.. वो पहली क्लास स्कूल की, वो बस्ता किताबों का, वो पहली प्रार्थना ईश्वर की, वो पहली प्रतिज्ञा देशप्रेम की। वो कच्छी मिट्टी कक्षा की, वो बिछी चटाई रेशम की, वो श्यामपट, वो गुरुजी का डर, वो खेल का मैदान, छुट्टी की घंटी..सब ढूंढते हैं। वो टूटा हुआ मकान पुराना, वो शाम का ढलना सुहाना, वो सूरज की पहली किरण, वो पक्षियों को चहचहाना। वो डाली पर बैठा मोर, वो पड़ोस से आता बच्चों का शोर, वो गांव की चौपाल, वो बड़ों सम्मान, वो दादा जी का हुक्का, वो दोस्त मेरा गोपाल..सब ढूंढते हैं... वो मकर संक्रांति-मऊ की पंचमी,वो फ्यूंली के पीले फूल, वो चैत्र की खुसफुसाहट, वो होली के गुलाल और उड़ती धूल। वो सावन वो भादो, वो राखी में बहन का इंतज़ार। वो दिवाली, वो इगास-बग्वाल, वो भैलें, वो मित्रों की टोली को मेरी जग्वाल..सब ढूंढते है तुझे। Pari✍️ 

विकास या विनाश? देवभूमि..हो रहा सत्यानाश

 विकास की ताल ठोक, अतिक्रमण हटाने का था बहाना, तोड़ हमारे पुस्तैनी घर बार, न जाने किसे था इनको बसाना। चौड़ीकरण के नाम पर, रोजगार हमारा छीन लिया, अब फ्री का लैमचूस दे रहे और विकास बल तुम्हारा कर दिया। पहाड़ की जवानी और पहाड़ पानी, दोनों को बांध दिया किसने, कौन है तीर्थों को भी पर्यटक स्थल बना दिया जिसने। महायोजना है बल कोई, बद्री केदार धाम को चमकाने की, कौन समझाए इन मूर्खों को, देवों को पसंद है जगह शांति की। विकास के नाम पर योजना चला रहे, साल दर साल पहाड़ उजाड़ रहे, केदारनाथ आपदा से सीख नहीं ली, थराली, धराली को न्योता दिया। बिजलीघर बना अनेक, बादल को फटने के लिये मजबूर था किया। अब भी सुध नहीं ली अगर, फिर भविष्य में पहाड़ आयेगा नहीं नजर। क्या अस्तित्व तेरा बचेगा, क्या सुकून तुझे कहीं फिर आयेगा? बिना पानी पहाड़ क्या भविष्य सुरक्षित रह पायेगा? ऐसे न जाने कितने और सवाल है आने वाली पीढ़ी के, निडर होकर कल तू क्या उस पीढ़ी का सामना कर पायेगा? Pari✍️ 

जय भारत

  जय हिंद जय भारत दृढ़ निश्चय था बातो में, तिरंगा लिए हाथो में, फिक्र न थी जवानी की, देनी जान की कुर्बानी थी। फैसला किया अडिग था आज, लायेंगे अपना स्वराज, हर मुख पर मुस्कान होगी, नही अब गुलामी होगी। कहकर नहीं अब तो, छीन के आजादी लाएंगे, सर कटा देंगे यारो, नहीं तिरंगा झुकने कभी देंगे। आया फिर वो भी मंजर, मन की चाह को राह मिली, लाखों लाशों पर चढ़कर, फिर भारत माँ आजाद हुयी। हुआ सवेरा फिर आजादी का, जगी उम्मीद फिर खुशहाली की, मिला स्वराज फिर शर्तो पर, चुकायी भारी कीमत आजादी की। नही चाहिए जान तुम्हारी, नही मांगते कोई बलिदान तुम्हारा  बस कसम चाहिए एक ही सबसे, रखेंगे विजयी विश्व तिरंगा प्यारा pari ✍️ 

मोहब्बत बस एक तुमसे

चलो आज कह ही देते हैं, मेरी जान हम बस तुमसे मोहब्बत करते हैं, जताते नहीं हैं बताते नहीं है लेकिन इक पल को भी तुझे भुलाते नहीं है। वो तुझसे लड़ना-झगड़ना, तो क्या मोहब्बत में किसी को सताते नहीं हैं तुम रहोगे साथ हर फैसले में जानते हैं, बस तुझे खुलकर कभी बताते नहीं हैं।। अगर करो तुम यकीं तो बस दुनिया से अपनी मोहब्बत को छिपा रखा है  तुमसे होती है अनबन अक्सर ही, यही झांसा मेरी जान सबको दिला रखा है। कहते है कि अधिक प्यार न करना, अक्सर आपस में दूरियां हो जाती है, बस यही बात मन को डराती है और मोहब्बत तुम्हारी सबसे छुपाई जाती है। अक्सर ही मिल जाते है अनेकों जो करीब आने की कोशिशें करते हैं, यकीन मानो मेरी जान सबको कर नजरअंदाज हम बस तुम्हे ही चाहते है। ये दुनियां है कि आडंबरों से भरी है, करती कुछ और कुछ दिखाती है, तू भी न आ जाए इसके झांसे में कहीं, बस ये बात अक्सर मुझे सताती है। लिखने को तो शब्द रूपी अनेक बाण हैं मेरी तरकश में मानो अगर तुम, मैं कहीं भी रहूं कैसा भी रहूं लेकिन ख्वाबों ख्यालों में हो बस एक तुम। मेरी हर सुबह हर शाम हर एक पल की हसीन दास्तान हो तुम, अगर करो मुझपर यकीं तो माटी की म...

ख्यालों की ओट से

 खुशियों का सावन भी तुम हो  ये चमचमाता शहर ये जगमगाती मिनारें, फिर भी जीवन है जैसे सड़क के किनारे। तुम खुश रहो इन चकाचौंध के शहर में, मुझे छोड़ आओ मेरे गाँव की सहर में.. शहर उसका था लोग भी उसके थे, हम तो बस एक मुसाफिर भर थे। न जाने कैसे संभले हम जानते ही नहीं,  वरना तूफान जिंदगी में अपने भी बहुत थे।  मुस्कुराता चेहरा तेरा जैसे कोई खिलता गुलाब है, खूबसूरत ये निगाहें जैसे आने वाला कोई सैलाब है अधरों से गिरते हैं शब्द रूपी पुष्प ऐसे ये तेरे, जैसे खिलने वाला हो कोई गुलिस्तां शहर में मेरे।  ख्वाइशों के शहर को बस ख्वाइशों में रहने दो,   ख्यालों में है वो अगर तो ख्यालों में रहने दो।   मुद्दतों के बाद मिले हो आज हमशे  अधरों को सिले और नयनों को कहने दो....  उसके नयन कितने खूबसूरत थे, ये बयां करने को लब्ज़ नहीं मिलते, बस इतना ही कह सकता हूं, कि ये जब जब मिले, हम वहीं ठहर गए.. Pari ✍️ 

अब कोई संवेदना नहीं चाहिए

अब हमें न श्रद्धांजलि और न संवेदना चाहिये, सिर्फ कायरों के कटे हुये सिर चाहिये, शान्ति चाहने वाला कृष्ण नहीं, रक्तबीज का खून पीने वाली महाकाली चाहिये.. नहीं अब कोई वार्ता कोई संवाद चाहिये, दुश्मनों के दिलों में परशुराम का खौफ चाहिए। अब न कोई बहाना न कोई सवाल जवाब चाहिये, निर्दोष हिंदुओ के लिये बस एकतरफ़ा इंसाफ चाहिए। सिर्फ सरकार की नहीं हमारी भी ज़िम्मेदारी है, क्योंकि देश विकास में हमारी भी भागीदारी है। देश के दुश्मन आक्रांताओं से देश को बचाना है, देशहित-जनहित में साथ सरकार का निभाना है।। Pari✍️

ख्वाइशों का शहर

 कुछ बातें बस एहसास तक सीमित होती है, होंठ ख़ामोश रहते हैं, आंखे बयाँ करती है..! आज सालों बाद दिल खोलकर उसने कुछ कहा, जैसे अटका था सैलाब आज हो फिर बहा। हर बात आज दिल की जुबां पर आ गयी, वो तब भी हमारी थी आज भी है.  बस कबूल कर गई ।      देखकर हम तुम्हे बस देखते रह जाते हैं, सोचते हैं ये नूर तुमने पाया कहां से है। काश कोई ख्वाइश हो पूरी अगर आज भी, बस कुछ पलों के लिए तुम पास आ जाओ अभी। तेरी आंखें कितनी खूबसूरत है ये बयाँ करने को मुझे लब्ज नहीं मिलते। बस इतना ही कह सकता हूँ तुमसे, कि जब जब देखता हूं बस देखते रह जाता हूं..। क्या कभी तुमने कुछ एहसास किया है, किसी अनजाने चेहरे से प्यार किया है? अक्सर जो खास था तुम्हारे लिए जीवन मे, उस अनकही मोहब्बत को दूर महसूस किया है? ज़िन्दगी ने न जाने क्यूँ ऐसा मजबूर किया है, खुद ही खुद को खुद की मोहब्बत से दूर किया है। वो रहती है पल पल हर पल मेरे साथ यकीनन, मेरा दिल उसके पास है सिर्फ कुदरत ने जिस्म दूर किया।। Pari ✍️