अब कोई संवेदना नहीं चाहिए

अब हमें न श्रद्धांजलि और न संवेदना चाहिये,

सिर्फ कायरों के कटे हुये सिर चाहिये,

शान्ति चाहने वाला कृष्ण नहीं,

रक्तबीज का खून पीने वाली महाकाली चाहिये..


नहीं अब कोई वार्ता कोई संवाद चाहिये,

दुश्मनों के दिलों में परशुराम का खौफ चाहिए।

अब न कोई बहाना न कोई सवाल जवाब चाहिये,

निर्दोष हिंदुओ के लिये बस एकतरफ़ा इंसाफ चाहिए।


सिर्फ सरकार की नहीं हमारी भी ज़िम्मेदारी है,

क्योंकि देश विकास में हमारी भी भागीदारी है।

देश के दुश्मन आक्रांताओं से देश को बचाना है,

देशहित-जनहित में साथ सरकार का निभाना है।।

Pari✍️

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