विकास या विनाश? देवभूमि..हो रहा सत्यानाश
विकास की ताल ठोक, अतिक्रमण हटाने का था बहाना,
तोड़ हमारे पुस्तैनी घर बार, न जाने किसे था इनको बसाना।
चौड़ीकरण के नाम पर, रोजगार हमारा छीन लिया,
अब फ्री का लैमचूस दे रहे और विकास बल तुम्हारा कर दिया।
पहाड़ की जवानी और पहाड़ पानी, दोनों को बांध दिया किसने,
कौन है तीर्थों को भी पर्यटक स्थल बना दिया जिसने।
महायोजना है बल कोई, बद्री केदार धाम को चमकाने की,
कौन समझाए इन मूर्खों को, देवों को पसंद है जगह शांति की।
विकास के नाम पर योजना चला रहे, साल दर साल पहाड़ उजाड़ रहे,
केदारनाथ आपदा से सीख नहीं ली, थराली, धराली को न्योता दिया।
बिजलीघर बना अनेक, बादल को फटने के लिये मजबूर था किया।
अब भी सुध नहीं ली अगर, फिर भविष्य में पहाड़ आयेगा नहीं नजर।
क्या अस्तित्व तेरा बचेगा, क्या सुकून तुझे कहीं फिर आयेगा?
बिना पानी पहाड़ क्या भविष्य सुरक्षित रह पायेगा?
ऐसे न जाने कितने और सवाल है आने वाली पीढ़ी के,
निडर होकर कल तू क्या उस पीढ़ी का सामना कर पायेगा?
Pari✍️
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