ख्वाइशों का शहर
कुछ बातें बस एहसास तक सीमित होती है,
होंठ ख़ामोश रहते हैं, आंखे बयाँ करती है..!
आज सालों बाद दिल खोलकर उसने कुछ कहा,
जैसे अटका था सैलाब आज हो फिर बहा।
हर बात आज दिल की जुबां पर आ गयी,
वो तब भी हमारी थी आज भी है. बस कबूल कर गई ।
देखकर हम तुम्हे बस देखते रह जाते हैं,
सोचते हैं ये नूर तुमने पाया कहां से है।
काश कोई ख्वाइश हो पूरी अगर आज भी,
बस कुछ पलों के लिए तुम पास आ जाओ अभी।
तेरी आंखें कितनी खूबसूरत है
ये बयाँ करने को मुझे लब्ज नहीं मिलते।
बस इतना ही कह सकता हूँ तुमसे,
कि जब जब देखता हूं बस देखते रह जाता हूं..।
क्या कभी तुमने कुछ एहसास किया है,
किसी अनजाने चेहरे से प्यार किया है?
अक्सर जो खास था तुम्हारे लिए जीवन मे,
उस अनकही मोहब्बत को दूर महसूस किया है?
ज़िन्दगी ने न जाने क्यूँ ऐसा मजबूर किया है,
खुद ही खुद को खुद की मोहब्बत से दूर किया है।
वो रहती है पल पल हर पल मेरे साथ यकीनन,
मेरा दिल उसके पास है सिर्फ कुदरत ने जिस्म दूर किया।।
Pari ✍️
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