जय भारत
जय हिंद जय भारत
दृढ़ निश्चय था बातो में, तिरंगा लिए हाथो में,
फिक्र न थी जवानी की, देनी जान की कुर्बानी थी।
फैसला किया अडिग था आज, लायेंगे अपना स्वराज,
हर मुख पर मुस्कान होगी, नही अब गुलामी होगी।
कहकर नहीं अब तो, छीन के आजादी लाएंगे,
सर कटा देंगे यारो, नहीं तिरंगा झुकने कभी देंगे।
आया फिर वो भी मंजर, मन की चाह को राह मिली,
लाखों लाशों पर चढ़कर, फिर भारत माँ आजाद हुयी।
हुआ सवेरा फिर आजादी का, जगी उम्मीद फिर खुशहाली की,
मिला स्वराज फिर शर्तो पर, चुकायी भारी कीमत आजादी की।
नही चाहिए जान तुम्हारी, नही मांगते कोई बलिदान तुम्हारा
बस कसम चाहिए एक ही सबसे, रखेंगे विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
pari ✍️
Comments
Post a Comment