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प्रेम एक पूर्णविराम..!

कैसी भी हो बात दिल की, थोड़ी तो छुपा लेनी चाहिये, सोच समझकर ही किताब दिल की अपनी खोलनी चाहिये। यूहीं आँख मूँदकर नहीं करते भरोसा हर किसी पर, जज्बातों की दुकान हर किसी के आगे खोलनी नहीं चाहिये। सालों बीत जाते हैं जहाँ में, एक नायाब दोस्त खोजने में, लेकिन एक पल नहीं लगता, वो नायाब हीरा खो देने में। मुफ्त में मिल जाती है सलाह हर ओर से तुमको यकीनन, लेकिन भरोसा नहीं मिलता कभी भी लाखों लुटाने में..।। एक उम्मीद हमने भी की थी कि जवाब में प्रेम मिलेगा, जैसा हमने चाहा है उसे वैसे ही वो भी दिल खोल देगा। नहीं था हमें मालूम कि हर चाह पूरी नहीं होती जहां में, ख्वाइशें नहीं मुकम्मल होती हर किसी की जहां में.. चलो अब हम भी अपना दिल कैद पिंजरे में कर लेते हैं छोड़कर राहें प्रेम की हकीकत के जहां में जी लेते हैं। प्रार्थनाओं में खुशियाँ मांग लेंगे उनकी ईश्वर से हम भी। साँस थमने तक उसका नाम नहीं लेंगे अब हम भी... कर लिया है खुद से वादा, कि अब एक नई डगर खोजेंगे, राह अब दोबारा मोहब्बत की, हम अब नहीं नापेंगे। बहुदा प्रेम पा लिया तुमने, pari इस जन्म में, छोडकर ये डगर अब हम, प्रेम पर पूर्णविराम लगायेंगे..।। pari✍️

तुझसे मुलाकात होती रहे

 तेरी हर बात मुझे अच्छी लगती है, हुयी हर एक मुलाकात अच्छी लगती है। तेरे लहजे में थी वो नजाकत मुझे याद है, वो झुकी नजरों से मुस्कुराना मुझे याद है वो खामोशियों में भी बहुत कुछ कह जाना, मुस्कुराते चेहरे पर गुस्से का वो आ जाना। मुझे याद है वो तेरा होंठो को सिले रखना, और छोटी छोटी बातों में वो रूठना मनाना.. वो आखिरी मुलाकात के कुछ पल, याद है मुझे वो हमारा आज और कल। कस्मे वादों का वो सिलसिला याद है, वो संग जीने मरने की ख्वाईशें याद है। आज सालों बाद वक्त ने खुद को दोहराया है, न जाने किस इरादे से हमें एक सामने लाया है। तुम भी उम्र के अनेक सावन को देख चुकी हो, हमने भी अनेकों सावन बिन तेरे बिता लिये हैं... खैर अब तो बस एक ही आरजू है ईश्वर से आखिरी, मुकम्मल खुशियाँ मिलें तुम्हें हर बार ही। यूहीं समय समय पर तुझसे मुलाकात होती रहे, जीवन के पूर्णविराम से पहले तुझसे हम जरूर मिलें।। ✍️pari

यूँही कुछ लम्हों की बात

आँखे जैसे कोई शराब हों होंठ तेरे पंखुड़ी गुलाब सी। यूँ लहराना तेरा केशों को.. अदायें तेरी बेहद खास सी... झुकी आँखों मे तेरे वो सवाल अच्छा है, मुलाकात न सही तुझसे बात होना अच्छा है। नजरे जो फेरी हमने जहाँ में यहाँ वहाँ, तो देखा होंठों का तेरे गुलाब अच्छा है...! चाह थी कि राह में मिले कोई चाह से, लेकिन अगर वो आ न सके किसी औऱ की चाह से, राह क्यों बीरान लगे फिर बोलो उसकी चाह से, हम भी चले राह को अपने फिर अपनी चाह से... लिखावट को अपनी थोड़ा और सुधार लेंगे, शब्दों को कैसे जोड़ना है वो भी सीख जायेंगे। लेकिन कर के वादा मुकर जाते हैं कैसे, हुनर न जाने वो कहाँ सीख पायेंगे। सच को सच कहने का हुनर चाहिये, जो कर सको वही बात कहनी चाहिये। बेशक कह दो न किसी बात से तुम, लेकिन कही बात को झुठलाना नहीं चाहिये.. कुछ बात करी हमसे, फिर अधूरी ही छोड़ दी, दोस्ती अगर करनी थी तो फिर क्यों तोड़ दी। न जाने कौन सी बात है जो सच थी दोनों में, शायद बात जरूरी नहीं थी या फिर हम.. किया था वादा की मुलाकात करेंगे, अनकही बातों को मिलकर कहेंगे.. न जाने कितनी बड़ी बात थी पास उनके, जो कहा उन्होंने कि फुर्सत में करेंगे.. न दिल मे कोई ...

एक मुलाकत तुझसे आज फिर

सालों बाद फिर तुझसे मुलाकात हुयी लगा जैसे आस कोई आज पूरी हुयी। इक पल लगा जैसे कि समय ठहर जायेगा वो गुजरा हुआ वक्त जैसे फिर लौट आएगा। इक समय था ऐसा भी वो मेरे यार, मेरे दिल में तेरे लिये था अथाह प्यार। उम्मीद थी मुझे भी किस्मत से कुछ ऐसी, कि तुझे भी थी तलाश हमेशा ही मुझ जैसी। वो तेरा नजरे चुराना, वो मुड़मुड़कर देखना, वो अनचाहे बहानों से मुलाकात करना। मेरा होता था फिर तेरी गली से गुजरना कैसे भला मैं भुला दूं तेरा वो फिर मुस्कुराना। कुछ कसमें थी खायी, कुछ किये थे वादे, लाख बुरे रहें हो लेकिन हमेशा नेक थे इरादे, तेरा वो इंतज़ार करना, झूठमूठ में फिर गुस्सा हो जाना, आदत्तन फिर प्यार में तेरा वो लड़ना झगड़ना।। इक इक बात आज फिर जैसे आँखों मे दिख गयी, तेरे दिल मे भी है वही कसक आज मुझे भी दिख गयी। दिलों में थी आस जब दोंनो के एक जैसी बताओ, यार फिर क्यों राहें अलग अलग तेरी मेरी हो गयी। चलो छोड़ो अब वक्त गुजर चुका है, मैं किसी और और तू किसी और का हो चुका है। फिर भी सच कहो कि कहीं कोई बात अधूरी सी है क्या, तेरे दिल मे मेरी वही जगह आज भी है क्या...? पर यार एक बात तू मुझे और फिर बता जाना, वक्त से पहले ही क्...

मुस्कुराओ मुश्किल में भी

 आफिस की थी ऐसी मेरी ज़िंदगी, सुबह उठते ही हो जाती थी जॉब से बंदगी। बार बार अलार्म बंद करना.. 5 मिनट और सोच 30 मिनट सो जाना। फिर कभी नहाए तो कभी ऑफिस गए परफ्यूम लगाए, कभी फ्रंट सीट तो कभी लास्ट वाली कैब की है भाये। फिर वही रोज 8:30-5:30 रूटीन शुरू हो जाता, बस यही ज़िंदगी थी या कैसी ये जिंदगी थी कोई मुझे भी तो बताये... फिर 2020 में दुनिया को महामारी ने घेरा.. जैसे सबकी जीवन मरण का हो गया फेरा.. माना कि समय बेहद ही मुश्किल था, बहुतों के लिए लेकिन जैसे वरदान भी था... कुछ ने खूब लूट मचाई कुछ ने इंसानियत दिखायी... इसी बीच मेरा वर्क फ्रॉम होम हुआ... डर के मारे मैंने भी गॉव की टिकट कटाई... अब मैं भी वर्क फ्रॉम होम करता हूं अपनी मैनेजमेंट टीम का निसदिन धन्यवाद करता हूं। हर मुश्किल समय मे वो मेरे साथ थे.. मेरे कलीग मेरे अपनो से कम नहीं थे.. अब मैं घर और आफिस में समन्वय करना सीख गया हूँ, सुबह नाश्ता, दिन में लंच और रात का डिनर बनाना सीख गया हूँ.. बच्चों के रोने के शोर को म्यूजिक समझता हूं.. बीवी कहे कुछ तो उसे भी इग्नोर करता हूँ... ये तो हुयी कुछ मजाक की बात, लेकिन घर और आफिस दोनों परिवारों ने...

तेरी जरूरत आज मुझे

 मुझे जरूरत है तेरी क्योंकि मेरा समय अनुकूल नहीं है, और तुझे इसकी खबर नहीं, फिर क्या ही तुमने मुझे समझा। न माथे पर शिकन न आँखों में आँसू ला सकता हूँ, बिना इसके तू दर्द जान ले मेरा, तो मानु की समझा तूने।। वक्त भी मेरे साथ नहीं और तूने भी बेरुखी अपना ली, आज जरूरत है तेरी की तू कहे मैं हूँ ना साथ तुम्हारे, यकीनन मेरा भी समय कल बदलेगा ईश्वर पर यकीं है, फिर साथ देने की बात करोगे तो फिर क्या ही बात होगी।। मेरे लाखोँ किये जतन सब बेकार हो रहे, जहां भी जाऊं बस मायूसी मिल रही। एक बस तेरे चेहरे की मुस्कान का था सहारा, वो भी तूने मुझसे छीन, कर लिया मुझसे किनारा। दिल को मजबूत कर के जीने का फैसला है अब, सिर्फ अपने से करेंगे उम्मीद यही फैसला है अब। कल तो मेरा होगा ही साथ मे तुम्हारा भी साथ होगा, लेकिन जो जगह आज है शायद वो अब फिर कभी नहीं।। Pari✍🏻

इंतज़ार आज भी

चलो एक दौर नया लिखते हैं, चलो एक पहल नयीं करते हैं.. तुम कर आओ भ्रमण जहां का, हम इंतज़ार फिर वहीं करते हैं.. उम्र का कोई भी भले पड़ाव हो, दिल से हमेशा जवान बने रहना.. समय भले हो कैसा भी चाहे... आदत तुम्हारी हो मुस्कुराते रहना✍🏻 यादों को सिरहाने पर रखकर सोना, फिर नींद में जाने की जरूरत नहीं होगी, बेशक गुजर जायेगी रात खुली पलकों से, लेकिन ये रात बेशुद होने से बेहतरीन होगी..! होंठ सिले थे लेकिन निगाहें बयाँ कर गयी, तुम भले चले गए लेकिन यादें रह गयी। मुझे यकीं था कि तुम आज नहीं तो कल बोलोगे, एक न एक दिन इन सिले होठों को खोलोगे.. मुझे मेरी किस्मत पर पूरा भरोसा है, इसने मुझे मेरी चाह का न कभी परोसा है... बड़ी मुश्किल से  है मेरी मुलाकात अपनो से, इसने मुझे अक्सर मुझसे भी कोसों दूर रखा है मन के एहसासों को कविता में पिरो रखा है, जज्बातों को शब्दों का स्वरूप दे रखा है। माना कि कोशिश है तुम्हारी दर्द को बयां करने की। लेकिन बेहद खूबसूरती से जीवन को लिखा है... किया है बस एक जुर्म मैंने भी जानकर, कि कर बैठा मोहब्बत तुझसे बिना सोचकर। अब हो गयी गलती लेकिन सजा इतनी बड़ी क्यों? होकर बेकसूर हर बार फिर भ...