यूँही कुछ लम्हों की बात

आँखे जैसे कोई शराब हों

होंठ तेरे पंखुड़ी गुलाब सी।

यूँ लहराना तेरा केशों को..

अदायें तेरी बेहद खास सी...


झुकी आँखों मे तेरे वो सवाल अच्छा है,

मुलाकात न सही तुझसे बात होना अच्छा है।

नजरे जो फेरी हमने जहाँ में यहाँ वहाँ,

तो देखा होंठों का तेरे गुलाब अच्छा है...!


चाह थी कि राह में मिले कोई चाह से,

लेकिन अगर वो आ न सके किसी औऱ की चाह से,

राह क्यों बीरान लगे फिर बोलो उसकी चाह से,

हम भी चले राह को अपने फिर अपनी चाह से...


लिखावट को अपनी थोड़ा और सुधार लेंगे,

शब्दों को कैसे जोड़ना है वो भी सीख जायेंगे।

लेकिन कर के वादा मुकर जाते हैं कैसे,

हुनर न जाने वो कहाँ सीख पायेंगे।


सच को सच कहने का हुनर चाहिये,

जो कर सको वही बात कहनी चाहिये।

बेशक कह दो न किसी बात से तुम,

लेकिन कही बात को झुठलाना नहीं चाहिये..



कुछ बात करी हमसे, फिर अधूरी ही छोड़ दी,

दोस्ती अगर करनी थी तो फिर क्यों तोड़ दी।

न जाने कौन सी बात है जो सच थी दोनों में,

शायद बात जरूरी नहीं थी या फिर हम..


किया था वादा की मुलाकात करेंगे,

अनकही बातों को मिलकर कहेंगे..

न जाने कितनी बड़ी बात थी पास उनके,

जो कहा उन्होंने कि फुर्सत में करेंगे..


न दिल मे कोई मलाल है, न आँखों के कोई हया,

मुझे छोड़कर तू ही बता, तूने क्या ही पा लिया।

रातें आज तेरी तनहा है, जो कभी खुशगवार होती थी,

यूँ हीं गुमनामी को गले लगाकर, भला तुझे क्या ही मिल


बहुत झूठ बोल लिया तुझसे, अब मैं भी सच बोलता हूं,

इश्क़ है तुझसे ये बात अलग है, लेकिन फुरसत में तुझे ही सोचता हूँ।

बहुत कर ली कोशिशें मैंने, कि तुझे उतार फेंकू ज़हन से अब,

तेरी हर एक मुलाकात मुझे, तेरे और करीब ले आती है



कोई बात अगर कहूँ तो हो जाता है फसाना,

अगर मिल न सकू कभी तो समझना न बहाना।

बड़ी मुश्किल से लिखता हूं गजल सिवा तेरे

तेरी याद का क्या उसे तो रोज आना है..


मुद्दत से थी आरजू कि

कुछ बात हो उनसे फिर..

जब मौका मिला मुलाकात का..

 वो मिले भी तो जैसे अजनबी बनकर..


उनकी नजरों, उसकी अदाओ में गजब का शबाब था,

यही वो वजह है कि उसके चेहरे पर नकाब था...

हर कोई फना न हो जाये कहीं उसके प्यार में,

इसलिए निकलने नहीं दिया उसे खुले बाजार में..


जिसकी पहचान थी मुस्कान, अब वो खामोशियों में बदल गयी,

निःस्वार्थ करते थे कर्म, अब एक एक चीज स्वार्थी हो गयी।

बेशक बदलेगा नहीँ किरदार, ये वादा है तुमसे हमारा,

लेकिन अब किरदार का वैसे महकना, गुजरे जमाने की बात होगी..!!

©®pari✍️

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