तेरी जरूरत आज मुझे

 मुझे जरूरत है तेरी क्योंकि मेरा समय अनुकूल नहीं है,

और तुझे इसकी खबर नहीं, फिर क्या ही तुमने मुझे समझा।

न माथे पर शिकन न आँखों में आँसू ला सकता हूँ,

बिना इसके तू दर्द जान ले मेरा, तो मानु की समझा तूने।।


वक्त भी मेरे साथ नहीं और तूने भी बेरुखी अपना ली,

आज जरूरत है तेरी की तू कहे मैं हूँ ना साथ तुम्हारे,

यकीनन मेरा भी समय कल बदलेगा ईश्वर पर यकीं है,

फिर साथ देने की बात करोगे तो फिर क्या ही बात होगी।।


मेरे लाखोँ किये जतन सब बेकार हो रहे,

जहां भी जाऊं बस मायूसी मिल रही।

एक बस तेरे चेहरे की मुस्कान का था सहारा,

वो भी तूने मुझसे छीन, कर लिया मुझसे किनारा।


दिल को मजबूत कर के जीने का फैसला है अब,

सिर्फ अपने से करेंगे उम्मीद यही फैसला है अब।

कल तो मेरा होगा ही साथ मे तुम्हारा भी साथ होगा,

लेकिन जो जगह आज है शायद वो अब फिर कभी नहीं।।


Pari✍🏻


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