तुझसे मुलाकात होती रहे
तेरी हर बात मुझे अच्छी लगती है,
हुयी हर एक मुलाकात अच्छी लगती है।
तेरे लहजे में थी वो नजाकत मुझे याद है,
वो झुकी नजरों से मुस्कुराना मुझे याद है
वो खामोशियों में भी बहुत कुछ कह जाना,
मुस्कुराते चेहरे पर गुस्से का वो आ जाना।
मुझे याद है वो तेरा होंठो को सिले रखना,
और छोटी छोटी बातों में वो रूठना मनाना..
वो आखिरी मुलाकात के कुछ पल,
याद है मुझे वो हमारा आज और कल।
कस्मे वादों का वो सिलसिला याद है,
वो संग जीने मरने की ख्वाईशें याद है।
आज सालों बाद वक्त ने खुद को दोहराया है,
न जाने किस इरादे से हमें एक सामने लाया है।
तुम भी उम्र के अनेक सावन को देख चुकी हो,
हमने भी अनेकों सावन बिन तेरे बिता लिये हैं...
खैर अब तो बस एक ही आरजू है ईश्वर से आखिरी,
मुकम्मल खुशियाँ मिलें तुम्हें हर बार ही।
यूहीं समय समय पर तुझसे मुलाकात होती रहे,
जीवन के पूर्णविराम से पहले तुझसे हम जरूर मिलें।।
✍️pari
Comments
Post a Comment