मुस्कुराओ मुश्किल में भी
आफिस की थी ऐसी मेरी ज़िंदगी,
सुबह उठते ही हो जाती थी जॉब से बंदगी।
बार बार अलार्म बंद करना..
5 मिनट और सोच 30 मिनट सो जाना।
फिर कभी नहाए तो कभी ऑफिस गए परफ्यूम लगाए,
कभी फ्रंट सीट तो कभी लास्ट वाली कैब की है भाये।
फिर वही रोज 8:30-5:30 रूटीन शुरू हो जाता,
बस यही ज़िंदगी थी या कैसी ये जिंदगी थी
कोई मुझे भी तो बताये...
फिर 2020 में दुनिया को महामारी ने घेरा..
जैसे सबकी जीवन मरण का हो गया फेरा..
माना कि समय बेहद ही मुश्किल था,
बहुतों के लिए लेकिन जैसे वरदान भी था...
कुछ ने खूब लूट मचाई
कुछ ने इंसानियत दिखायी...
इसी बीच मेरा वर्क फ्रॉम होम हुआ...
डर के मारे मैंने भी गॉव की टिकट कटाई...
अब मैं भी वर्क फ्रॉम होम करता हूं
अपनी मैनेजमेंट टीम का निसदिन धन्यवाद करता हूं।
हर मुश्किल समय मे वो मेरे साथ थे..
मेरे कलीग मेरे अपनो से कम नहीं थे..
अब मैं घर और आफिस में समन्वय करना सीख गया हूँ,
सुबह नाश्ता, दिन में लंच और रात का डिनर बनाना सीख गया हूँ..
बच्चों के रोने के शोर को म्यूजिक समझता हूं..
बीवी कहे कुछ तो उसे भी इग्नोर करता हूँ...
ये तो हुयी कुछ मजाक की बात,
लेकिन घर और आफिस दोनों परिवारों ने दिया मेरा बहुत साथ
हर मुश्किल समय मे सब साथ थे हमारे,
यह बताता है अगर साथ हो अपनो का
तो कोरोना जैसा दानव भी हमसे है हारे...
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