परी की डायरी...मेरी तुम्हारी हमारी कहानी
जय श्री राम🚩
आज दिन रोज की तरह ही था, सुबह उठना और अपनी दिनचर्या को पूर्ण करना यही तो होता है...लेकिन जब कोई याद करे फोन करे...वह थोड़ा और अच्छा महसूस करवाता है...आजकल विश्व में त्राहि हो रही..युद्ध में अनेक आहूति देने को उतारू हैं..लेकिन इसका लाभ किसे मिलेगा वह तो भविष्य के गर्भ में ही सुरक्षित है...पहाड़ मेरे करीब हमेशा रहा और रहेगा... जीवनपर्यंत...फिर भी मैं पहाड़ अब कम ही जा पाता हूं..
पहाड़ न जा पाने की टीस मुझे अक्सर विचलित तो करती है, लेकिन मैं संभल जाता हूँ...
नाश्ता हुआ, वही रोज की तरह वॉट्सउप देखा और शुभ प्रभात....कुछ देर वीडियो देखने के बाद...ऑफिस जाने की तैयारी हो चली...ड्राइवर रोज की तरह हरकत से मजबूर...समय से पहले बुलाने लगा...मै भी सहज कुछ मिनिट पहले तो चला ही जाता हूँ... ऑफिस पहुंच मिलना सबसे....कुछ खिले तो कुछ मुरझाए चेहरे मिले....
और हां उसकी मुस्कान भी आज कायम थी...प्यारी सी...मित्रता और प्रेम ही जीवन में संगिनी को ला सकते हैं.. समाज कहता है.. अन्यथा आप पर शक किया जायेगा, दोषारोपण होगा...पर मै अक्सर मनमौजी सा रहता हूं...कोई पसंद आए तो कह देता हूं..लेकिन मन में कोई गलग धारणा कभी न रखी...बस कह दिया तारीफ में और फिर भुला दिया...
फिर काम निपटाया जो मिला था और दोस्तों के साथ चाय की चुस्की...शायद ये भी एक वजह है ऑफिस तक चले जाने की.. कभी साथ में चाय के साथ समोसे ..वाह स्वाद मैदे या नमक से ज्यादा साथियों के साथ का रहता है...शाम ढली और कुछ ठहाके होते हैं...फिर वापसी घर की...और रात को नींद का इंतजार....और साथ एक आस की सपने में होगी मुलाकात....
क्रमशः✍️
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