कौन जिम्मेदार? तलाश जारी..!
मन व्यथित होता है देख, खाली हो रहा गांव आज हर एक,
वीडियो बन रहे पहाड़ पर, बल अब रहना नहीं है यहां सेफ।
आपदाओं का घर है ये, तो कोई कह रहा गुलदार से बचाओ,
कौन है इसका जिम्मेदार, मनन कर अब आप ही बताओ।
विकास की ताल ठोक, अतिक्रमण हटाने का था बहाना,
तोड़ हमारे पुस्तैनी घर बार, न जाने किसे था इनको बसाना।
चौड़ीकरण के नाम पर, पहाड़ हमारा उजाड़ दिया,
कौन है जो विनाश कर रहा, और विकास का उसको नाम दिया।
पहाड़ की जवानी और पहाड़ पानी, दोनों को बांध दिया किसने,
कौन है वो तीर्थों को भी पर्यटक स्थल बना दिया जिसने।
महायोजना है बल कोई, बद्री केदार धाम को चमकाने की,
कौन समझाए इन मूर्खों को, देवों को पसंद है जगह शांति की।
विकास के नाम पर योजना चला रहे, साल दर साल पहाड़ उजाड़ रहे,
केदारनाथ आपदा से सीख नहीं ली, थराली, धराली को न्योता दिया।
बिजलीघर बना अनेक, बादल को फटने के लिये मजबूर था किया।
रोजगार हमारा छीन लिया और बल देखो हमने तुम्हारा विकास है कर दिया।
अब फ्री का लैमचूस दे रहे और इसको भी विकास कह रहे,
खेती करवाकर बंजर सबकी, अब सम्मान निधि हमें वो दे रहे।
न ढोल बचे न लौहार रहे, बस अब DJ और tent लग रहे,
सभ्यता हमारी दम तोड़ रही, मॉडर्न अब पहाड़ बल हो रहे।
अब भी सुध नहीं ली अगर, तो फिर इतिहास बनकर रह जाएगा,
पहाड़ और पहाड़ी दोनों पलायन कर बाहर कहीं बस जाएगा।
एक टीस हमेशा रहती है, और वो हर पल याद मुझे दिलाती है,
कलम से Pari तू कोशिश कर, बदलाव की रीत लिखी जाती है।
Pari✍️
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