पहाड़ और पहाड़ी बचाओ

मेरी पहचान बल उत्तराखंड, मेरी शान बल देवभूमि है,

मैं हूं पहाड़ी गर्व है मुझे, मेरी बोली भाषा गढ़वाली कुमाऊनी है।

चारों धाम है मेरी पहचान, मेरी जान देवभूमि में बसती है,

मैं हूं करता धन्यवाद प्रभु का, जो उत्तराखंड मेरी जन्मस्थली है।


कितना अच्छा लगता है, कितने प्यारे बोल दिखते हैं,

लेकिन क्या जीवन में मनन किया, सवाल फिर ऐसे उठते हैं।

मैं पहाड़ी मै उत्तराखंडी, गर्व से नारे रोज बजते हैं,

उत्तराखंड की फिक्र हम देखो, दूसरे शहरों में बस करते हैं।


आज उत्तरायण है बल दिल्ली में कौथिग लगाते हैं,

लेकिन क्या खुद हमारे बच्चे मकरैणी का महत्व जानते हैं?

घुघतिया हो या रोटल्या बार, बस स्टेटस तक सीमित रह गए,

हम तो बस अब पिज्जा बर्गर और चाउमीन के शौकिन हो गए।


अच्छा है कौथीग़ लगाओ, खूब भीड़ पहाड़ की एक जुट करवाओ,

लेकिन सिर्फ नाच गाने तक नहीं, पहाड़ बचाने की मुहिम भी गाओ।

संस्कृति सिर्फ मेलों से नहीं, परिवार में भी घोलनी पड़ती है,

डीजे पर देवता नाच रहे, क्या नहीं ये देवभूमि की बेइज्जती है।


पैसे की माया है हर जगह, पैसे का हो रहा है मेल,

नेता हो या इनफ्लुएंसर, व्यूज पाने का कर रहे खेल।

न भू-कानून, न अतिक्रमण, न विनाश रूपी विकास दिख रहा,

नेता, अभिनेता हो या यूट्यूबर, हर कोई बस फायदा खोज रहा,


सच कहूं मै pari अगर, तुमसे अपने मन की बात,

इस तरह की परिस्थित देती है, मुझे तो हृदय आघात,

अरे देखते हैं, सुनते है लोग, तुम्हारी अगर एक एक बात,

तो क्यों नहीं उठाते तुम, पहाड़ और पहाड़ी बचाओ की आवाज।


गांव खाली हो रहा, पहाड़ी रोजगार की भेंट चढ़ रहा,

खेतों को बंजर कर पहाड़ी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा तलाश रहा।

आवाज उठाओ पहाड़ की, खतरे में है पहाड़ी और पहाड़ आज,

करो अब अपनी आवाज बुलंद, नए आंदोलन का करो आगाज।।

Pari✍️



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