पहाड़ अब आपदा कु भंडार
विकास का नौ फर विनाश कना किलै तुम।
हमरी पुंगडी बाँजा करी, अफ्फू देहरादून बस्याँ किलै तुम।
पाणी रोकी बांध बणै, आपदा थै न्यूतू दीणा किलै तुम?
सड़क बणै गौ कु रस्ता बाघ थै बताणा किलै तुम..?
रोड टुटी लोग मरी, बस मुआवजा तक सीमित तुम,
आपदा आई कुड़ी बोगनी बस तमसु देखणा रयां तुम।
फसल फूकी सुंगरु न, देहरादून सुनिदं सियाँ तुम।
न क्वि देखणु, न खोज होई, बस बौंहडा प्वण्या तुम।
पलायन फर ज्ञान दीणा, पर योजना कुछ नि बणांदा तुम,
रोजगार फंडू फूका, शिक्षा स्वास्थ्य भी नि दे सक्यां तुम।
कनु कै रालू पहाड़ी पहाड़ मा, जब मूलभूत सुविधा भी हुयीं गुल,
बाघ, सुंगर, और भालू से आज, सरू पहाड़ देखा हुयूं फुल।
अब त चेती जाओ सरकार, आपदा की आयीं भरमार,
कभी भालू, कभी सुन्गर त कभी गुलदार कु करूं अत्याचार।
भोल दोष नि दियां जनता थै, जब सुरक्षा म उठाली हथियार।
कनु कै संघर्ष इनमा करलो "Pari," कुछ त करा अब तुम विचार।
©®Pari✍️
Comments
Post a Comment