वो बारिश तेरी वाली✍️
एक अरसा हो गया तुमसे मुलाकात हुए,
शायद अब तुम हमारी झलक भी हो भूल गए।
क्या वो पार्क का बेंच तुम्हे अब याद आता नहीं?
वो आखिरी मुलाकात की अधूरी बात सताती नहीं..?
आज फिर तुम शिकायत करोगी, जिक्र क्यों करते हो मेरा सावन में,
मैं समझती हूँ याद कर रहे हो, हिचकियां बता रही हैं,
पर क्या लिखना और एहसास को शब्द रूप देना जरूरी है,
क्यों लिख रहे वो किताब, जिसकी कहानी अधूरी है।
पर मैं भी क्या करूं यार, कलम खुद ही तुझे लिख देती है,
वो तेरा बालकनी से बरसती बूंदों को निहारना....
तुम अब शायद नहीं आती होंगी बाहर पहले की तरह,
लेकिन मेरी आँखें तो बस वही सावन खोजती हैं।
आज फिर सफर में हूं, फिर वही बारिश है.. हाँ! तेरे वाली,
यूं तो बारिश शायद एक सी होगी, तेरे वाली कुछ खास थी।
अब न वो सावन आता है, न ही वो बादल फिर कभी बरसे,
वो ख्वाइश अधूरी ही रही, हम ताउम्र बस एक तुझको तरसे।
तुम दूर हो आज याद आ गई, मुस्कुराते रहना बस यही ख्वाइश है,
देखते है कब तक यादों में रहोगे, अब तो सांसों की यही आजमाइश है।
तुम भूल जाना तुम्हारे लिए आसान होगा, मै यादें संजो के रख लूंगा
दिल में रखूंगा तस्वीर तेरी और तेरी यादों संग ही दुनिया से बिदा लूंगा।
Pari✍️
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