वो बात अलग थी

वादे निभाने होते हैं मोहब्बत में, सिर्फ आसरे नही रहा जाता,
सहने होते हैं दर्द अनेक इश्क़ में, हर कोई यूहीं किनारे नही आता।

वो सहर याद है मुझे आज भी, वो तेरा किनारे वाला मकान याद है,
वो मासूमियत से तेरे वादे याद हैं, वो थोड़ी सी खुलती तेरी खिड़की याद है।
आज भी नही भूला हूँ समझो ना, तूने कही थी जो बात सिर्फ बातों में,
मुस्कुराती है तू आज भी सुबह संग, गीले होते है तकिये मेरे रातो में।।

वो लम्हे अलग थे वो दिन अलग थे, सबसे अनोखे अपने इशारे अलग थे,
वो तेरा छत पर मुस्कुराना और मेरा साईकिल से निकल आना अलग था।
दूर गलियों में सैर पे निकलना संग हसीन लम्हे गुजारना अलग था,
यादों का सिलसिला अब बचा है, संग वक्त गुजारना हमारा अलग था।।

न कभी तोड़ी तुमने थी चुप्पी, न कभी साथ मेरा था छोड़ा,
फिर न जाने जीवन के उस मोड़ पर, तुमने क्यों हाथ मेरा छोड़ा।
जब कर दिया था खुद को नाम मेरे, फिर क्यों अधर में मुँह तुमने मोड़ा,
क्या वो वादे करार सब झूठ थे, जो नाजुक मेरा दिल तुमने तोड़ा।।

कुछ सवाल आज भी बाकी है, कुछ जवाब आज भी अधूरे हैं,
मेरे वादे सारे सच थे तब भी, मेरे करार सारे पक्के है आज भी।
न मैं बदला हूँ तनिक भी तुम जान लो, मेरे इरादे साफ है आज भी,
क्या तुमने कहीं छुड़ाया था हाथ यारा, या तुम अटक गयी किसी जाल में।।
Pari


© ® Pari....


Love is life.....Love is god....Love is everything..

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