शसक्त महिला, सुदृढ़ राष्ट्र
थोड़ा भोली है थोड़ा मासूम है, लेकिन कमजोर नही है,
कष्टो को है सहती हँसकर, लेकिन ये मजबूर नही है।
अलग अलग किरदार निभाती, जिसका कोई मोल नही है,
जीवन का है अभिन्न अंग, महिला तेरा कोई तोल नही हैं।।
हर पहलू में तुम हो समायी, हर लम्हा तुम बिन अधूरा है,
कितना भी सपन्न हो कोई, बिन तुम्हारे नहीं कोई पूरा है।
क्या कोई तुलना है तुझसे, बिन तेरे नही किसी का वजूद है,
तुम हो सम्पन्न सुदृढ़ नारी, जहां में सदैव हो सर्वोपरी।
Pari
कष्टो को है सहती हँसकर, लेकिन ये मजबूर नही है।
अलग अलग किरदार निभाती, जिसका कोई मोल नही है,
जीवन का है अभिन्न अंग, महिला तेरा कोई तोल नही हैं।।
हर पहलू में तुम हो समायी, हर लम्हा तुम बिन अधूरा है,
कितना भी सपन्न हो कोई, बिन तुम्हारे नहीं कोई पूरा है।
क्या कोई तुलना है तुझसे, बिन तेरे नही किसी का वजूद है,
तुम हो सम्पन्न सुदृढ़ नारी, जहां में सदैव हो सर्वोपरी।
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