सुवा त्वे बगैर

दूर यख परदेश मा, ज्यू खुदेन्दु सुवा त्वे बगैर,
यखुली ये दूर देश मा, आँसू नि रुकदा सुवा त्वे बगैर।

क्या करूं क्या बोलू समझ नि औन्दु अब मेरी सुवा,
खुदेन्द जिकुड़ी तरसदु प्राण अब नि रयेन्दू मेरी सुवा।

द्वी चार पैसा का खातिर, कन बिछढ़ो हुयूँ हमरू,
न त च हैंसी न क्वी करार, बस यादों मा जीणु हमरु।
ख्याल औंदी बन बनी मि भी दिन आला कुजणी कब,
डेरा मा दगडी तेरा ऑंखयु समणी छविं लगोला झणी कब

दूर यख...

याद भी आली त आँसू लुकाण, तेरी खुद जिकुड़ी मा छुपाण,
मन मारी की भी दूर च रैण जख तख बस त्वे खुज्याण।
रात्यु की नींद हरची, हरची दिन मा कु चैन,
भूख नि तीस नि तेरा बगैर, बस ज्यू रैन्दु बेचैन।।

दूर यख...

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