तेरी स्वाणी मुखड़ी, दिखे आज

आज ही के दिन हम अजनबी थे एक दिन क्या तुम्हें याद है
एक दूसरे की झलक को कितने तलब थे क्या तुम्हें याद है।

तुम मेरे लिए सोच रही होगी, मै तेरी कल्पना में डूबा था,
ज़िन्दगी में आने को एक नया लम्हा जैसे कितने करीब था।

कुछ उलझन थी मन मे कुछ उत्सुक थे हम,
हर एक चेहरे में तेरा चेहरा तलाशते थे हम।

इन होली उन होली दिल में तेरी तस्वीर थे बनाते,
क्या तुझे भी भाऊंगा एक सवाल खुद से थे करते।

मुलमुल सी मुस्कान होठों पे थी आती,
मुझसे मिलने की चाह तू भी भला किसे बताती।

फिर आ ही गया वो लम्हा भी धीरे धीरे,
रुक रुक में आये हम तुम्हे मिलने पास तेरे।

सबसे मिलना मुस्कुरा कर और लेते सबकी खबर,
आंखे तो बस तलाश रही थी तुझे, पाने को बस एक झलक।
कुछ हलचल थी मन में कुछ सवाल थे खुद से,
तू भी तो घबराई होगी जैसे मुराद होगी आज पूरी कब से।।
......

Pari
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