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ख्यालों की ओट से

 खुशियों का सावन भी तुम हो  ये चमचमाता शहर ये जगमगाती मिनारें, फिर भी जीवन है जैसे सड़क के किनारे। तुम खुश रहो इन चकाचौंध के शहर में, मुझे छोड़ आओ मेरे गाँव की सहर में.. शहर उसका था लोग भी उसके थे, हम तो बस एक मुसाफिर भर थे। न जाने कैसे संभले हम जानते ही नहीं,  वरना तूफान जिंदगी में अपने भी बहुत थे।  मुस्कुराता चेहरा तेरा जैसे कोई खिलता गुलाब है, खूबसूरत ये निगाहें जैसे आने वाला कोई सैलाब है अधरों से गिरते हैं शब्द रूपी पुष्प ऐसे ये तेरे, जैसे खिलने वाला हो कोई गुलिस्तां शहर में मेरे।  ख्वाइशों के शहर को बस ख्वाइशों में रहने दो,   ख्यालों में है वो अगर तो ख्यालों में रहने दो।   मुद्दतों के बाद मिले हो आज हमशे  अधरों को सिले और नयनों को कहने दो....  उसके नयन कितने खूबसूरत थे, ये बयां करने को लब्ज़ नहीं मिलते, बस इतना ही कह सकता हूं, कि ये जब जब मिले, हम वहीं ठहर गए.. Pari ✍️ 

अब कोई संवेदना नहीं चाहिए

अब हमें न श्रद्धांजलि और न संवेदना चाहिये, सिर्फ कायरों के कटे हुये सिर चाहिये, शान्ति चाहने वाला कृष्ण नहीं, रक्तबीज का खून पीने वाली महाकाली चाहिये.. नहीं अब कोई वार्ता कोई संवाद चाहिये, दुश्मनों के दिलों में परशुराम का खौफ चाहिए। अब न कोई बहाना न कोई सवाल जवाब चाहिये, निर्दोष हिंदुओ के लिये बस एकतरफ़ा इंसाफ चाहिए। सिर्फ सरकार की नहीं हमारी भी ज़िम्मेदारी है, क्योंकि देश विकास में हमारी भी भागीदारी है। देश के दुश्मन आक्रांताओं से देश को बचाना है, देशहित-जनहित में साथ सरकार का निभाना है।। Pari✍️

ख्वाइशों का शहर

 कुछ बातें बस एहसास तक सीमित होती है, होंठ ख़ामोश रहते हैं, आंखे बयाँ करती है..! आज सालों बाद दिल खोलकर उसने कुछ कहा, जैसे अटका था सैलाब आज हो फिर बहा। हर बात आज दिल की जुबां पर आ गयी, वो तब भी हमारी थी आज भी है.  बस कबूल कर गई ।      देखकर हम तुम्हे बस देखते रह जाते हैं, सोचते हैं ये नूर तुमने पाया कहां से है। काश कोई ख्वाइश हो पूरी अगर आज भी, बस कुछ पलों के लिए तुम पास आ जाओ अभी। तेरी आंखें कितनी खूबसूरत है ये बयाँ करने को मुझे लब्ज नहीं मिलते। बस इतना ही कह सकता हूँ तुमसे, कि जब जब देखता हूं बस देखते रह जाता हूं..। क्या कभी तुमने कुछ एहसास किया है, किसी अनजाने चेहरे से प्यार किया है? अक्सर जो खास था तुम्हारे लिए जीवन मे, उस अनकही मोहब्बत को दूर महसूस किया है? ज़िन्दगी ने न जाने क्यूँ ऐसा मजबूर किया है, खुद ही खुद को खुद की मोहब्बत से दूर किया है। वो रहती है पल पल हर पल मेरे साथ यकीनन, मेरा दिल उसके पास है सिर्फ कुदरत ने जिस्म दूर किया।। Pari ✍️ 

बस यूहीं ख्याल आया

तलब उसकी है जो पास नहीं, और जो पास है उसकी कद्र नहीं। इसी दुःख में है आजकल सभी देखो, जो मिला काफी नहीं, चाह उसकी जो मिला नहीं..! दिल मे तस्वीर उसकी बना रखी है, मालूम है कि वो मुकम्मल नहीं होगी, रोज करते हैं उसका हो जाने की ख्वाइश, जानकर भी कि वो कभी पूरी नहीं होगी...!! सच कहूं तो तुम बहुत खराब हो, पर खूबसूरती में लाजवाब हो, लाख कोशिशें कर के देख लिया, लगी हो ऐसी आदत जैसे कोई शराब हो✍🏻 बडी मुद्दतो बाद उसे याद मेरी आयी, सालो बाद जब उसनेकॉल मुझे लगायी कहती रही कि डर डर के मुझसे हेलो बोला है, मैंने भी कहा इसी दिन की खातिर तो नंबर वही बदला है कुछ खास हो तुम की जो बता नहीं सकते, दिल मे हो फिर भी जता नहीं सकते, बेशक तुम्हे इल्म नहीं है हमारी चाह का, लेकिन जो चाह तुमसे है हम बता नहीं सकते✍🏻 तुम जो सामने हो बैठे, दिल को सुकूँ आ रहा है, तेरी सूरत को देख, प्यार बहुत आ रहा है। तेरा देखना वो नजरें चुराकर बार बार, तेरी हर अदा पे हो रहा हमें अब अधिक ऐतबार!! एक पल को तुम पास हो, फिर दूजे पल दूर नजर आते हो, माना कि मुकम्मल नहीं हो फिर भी दिल को भाते हो। बेशक अनजान है हम अभी एक दूसरे के लिए लेकिन, कुछ...

एक मुलाकात सालो बाद

आज फिर मिलने वो हमसे आयी हैं, मिलते ही निगाहें वो फिर शर्मायी हैं मालूम था उसे की हम भी उतने ही बेचैन है आकर पास उसने चुराए फिर हमसे नैन हैं... उसकी चाल में आज भी वही बात थी, सालों बाद भी वो वैसे ही इतरा रही थी। देखकर फिर मुस्कुराई वो पहले की तरह ही, जैसे कह रही हो मैं हो चली अब तो परायी ही। फिर वही सवाल था उसका मेरे से आज, कैसा है बताओ मुझसे मिलकर तुम्हारा मिजाज। उस पगली को अब मैं क्या ही बताता दिल का हाल, देख उसे सालों बाद, कैसे रहा था मैं खुद को संभाल। कैसे हो, क्या करते हो, कौन कौन है साथ तुम्हारे, सवाल थे उसके हमसे वही आज फिर पुराने। मैंने भी बस मुस्करा के कहा सब अच्छा है, कैसे कहता बिन तेरे अब अकेले ही दिन कटता है। फिर कुछ कही उसने अपने दिल की बात हमसे, लगा अभी भी कुछ बाकी रिश्ता है हमारा उससे। वो आखिरी मुलाकात, वो भूली नहीं कहा उसने, भूलकर सब आगे बढ़ जाओ कहा फिर उसने। मैं भी कुछ पल तो ठहर गया था उसी मोड़पर फिर से, लेकिन संभाला खुद को मैंने फिर दूसरी तरफ मुड़के। खत्म हो चुकी उम्मीदों को, आज फिर ज़िंदा कर गयी दूर हूँ लेकिन भुलाया नहीं, बिन कहे वो फिर कह गयी। भीगी पलकों से अलविदा कहा उ...

मेरा प्रेम बस एक तुम....

काश तुमने कोशिश तो की होती, दिल की बात हमसे तो कही होती। मेरा दिल भी था तलबगार तुम्हारा, एक बार मेरी बाँह प्रेम से पकड़ी तो होती.. सच कहूँ तो आज भी हम बस तुम्हारे हैं, जिस्म से दूर लेकिन जहन में तुम्हारे हैं। कोई छूता है तो तकलीफ होती है मानो अगर, जैसे हक है तुम्हारा ही बस इस ज़िन्दगी पर। अब मैं बंदिस में हूँ समाज के बंधन में कैद हूँ, लेकिन दिल मेरा कोई कैद कर पायेगा क्या? मेरे जिस्म को भले पा भी ले कोई सिवा तेरे, मेरी रूह को सिवा तेरे कोई छू पायेगा क्या? चल बस अब मैं नहीं कह सकती अधिक कुछ भी, पलक खुलने और बंद होते ही बस ख्वाइश है तेरी ही। तू इतना समझ ले मेरी बेचैनी को मेरे दिल के चैन, अब ताउम्र बिन तेरे मैं तेरे लिये ही बेचैन... Pari✍️

मेरी कल्पनाओं में..✍️

क्या करे जनाब ये दुनिया है, हर कोई ख्वाइश कहाँ मुकम्मल होती है, किसी को नींद चाहिये सोने के लिए, कोई जागना चाहता है किसी के लिए।।।😊 अक्सर मुस्कुरा देता हूँ मैं, जब जब वो पल याद आता है मुझे, समझा था जिसे दिल के बेहद करीब हमने, उस एक पल में समझ आया था हमारा दायरा हमें.. प्यारी मुस्कान संग आँखों मे काजल, बिना तीर के ही कर देते हैं घायल। यूँ देखना तुम्हारा नजरें झुका कर, इन्हीं अदायों के तो हम हुये हैं कायल.. शांत है बाहर से, मन मे भरी है हलचल, व्यक्त जीवन में, निकाले हमारे लिए कुछ पल, थोड़ा शरारत है थोड़ी है नटखट माना, वो,  लेकिन दिल की साफ, इसलिए तो है बेहद खास क्या भीड़ के होने से तन्हाई मिट जाती है,? सिर्फ धूप आने से मायूसी छट जाती है?? यकीन मानो अगर दिल की सुनने वाला साथ हो, सारी मुश्किलें भी मुस्काते हुए मिट जाती हैं..।। Pari✍🏻 इस जहाँ में एक दस्तूर है अगर मानो तो, चार दिन चालाकी चरम पर चलती है। कोई भी इतना नासमझ नहीं है समझ लेना, ठोकर एक ही पत्थर बार बार नहीं खायी जाती है..! न जाने कब वक़्त फिसल गया रेत की तरह, वो मिले बात हुयी और फिर बिछड़े किस तरह। यकीनन जीवन के किसी मोड़पर वो मिल...