Posts

एक मुलाकत तुझसे आज फिर

सालों बाद फिर तुझसे मुलाकात हुयी लगा जैसे आस कोई आज पूरी हुयी। इक पल लगा जैसे कि समय ठहर जायेगा वो गुजरा हुआ वक्त जैसे फिर लौट आएगा। इक समय था ऐसा भी वो मेरे यार, मेरे दिल में तेरे लिये था अथाह प्यार। उम्मीद थी मुझे भी किस्मत से कुछ ऐसी, कि तुझे भी थी तलाश हमेशा ही मुझ जैसी। वो तेरा नजरे चुराना, वो मुड़मुड़कर देखना, वो अनचाहे बहानों से मुलाकात करना। मेरा होता था फिर तेरी गली से गुजरना कैसे भला मैं भुला दूं तेरा वो फिर मुस्कुराना। कुछ कसमें थी खायी, कुछ किये थे वादे, लाख बुरे रहें हो लेकिन हमेशा नेक थे इरादे, तेरा वो इंतज़ार करना, झूठमूठ में फिर गुस्सा हो जाना, आदत्तन फिर प्यार में तेरा वो लड़ना झगड़ना।। इक इक बात आज फिर जैसे आँखों मे दिख गयी, तेरे दिल मे भी है वही कसक आज मुझे भी दिख गयी। दिलों में थी आस जब दोंनो के एक जैसी बताओ, यार फिर क्यों राहें अलग अलग तेरी मेरी हो गयी। चलो छोड़ो अब वक्त गुजर चुका है, मैं किसी और और तू किसी और का हो चुका है। फिर भी सच कहो कि कहीं कोई बात अधूरी सी है क्या, तेरे दिल मे मेरी वही जगह आज भी है क्या...? पर यार एक बात तू मुझे और फिर बता जाना, वक्त से पहले ही क्...

मुस्कुराओ मुश्किल में भी

 आफिस की थी ऐसी मेरी ज़िंदगी, सुबह उठते ही हो जाती थी जॉब से बंदगी। बार बार अलार्म बंद करना.. 5 मिनट और सोच 30 मिनट सो जाना। फिर कभी नहाए तो कभी ऑफिस गए परफ्यूम लगाए, कभी फ्रंट सीट तो कभी लास्ट वाली कैब की है भाये। फिर वही रोज 8:30-5:30 रूटीन शुरू हो जाता, बस यही ज़िंदगी थी या कैसी ये जिंदगी थी कोई मुझे भी तो बताये... फिर 2020 में दुनिया को महामारी ने घेरा.. जैसे सबकी जीवन मरण का हो गया फेरा.. माना कि समय बेहद ही मुश्किल था, बहुतों के लिए लेकिन जैसे वरदान भी था... कुछ ने खूब लूट मचाई कुछ ने इंसानियत दिखायी... इसी बीच मेरा वर्क फ्रॉम होम हुआ... डर के मारे मैंने भी गॉव की टिकट कटाई... अब मैं भी वर्क फ्रॉम होम करता हूं अपनी मैनेजमेंट टीम का निसदिन धन्यवाद करता हूं। हर मुश्किल समय मे वो मेरे साथ थे.. मेरे कलीग मेरे अपनो से कम नहीं थे.. अब मैं घर और आफिस में समन्वय करना सीख गया हूँ, सुबह नाश्ता, दिन में लंच और रात का डिनर बनाना सीख गया हूँ.. बच्चों के रोने के शोर को म्यूजिक समझता हूं.. बीवी कहे कुछ तो उसे भी इग्नोर करता हूँ... ये तो हुयी कुछ मजाक की बात, लेकिन घर और आफिस दोनों परिवारों ने...

तेरी जरूरत आज मुझे

 मुझे जरूरत है तेरी क्योंकि मेरा समय अनुकूल नहीं है, और तुझे इसकी खबर नहीं, फिर क्या ही तुमने मुझे समझा। न माथे पर शिकन न आँखों में आँसू ला सकता हूँ, बिना इसके तू दर्द जान ले मेरा, तो मानु की समझा तूने।। वक्त भी मेरे साथ नहीं और तूने भी बेरुखी अपना ली, आज जरूरत है तेरी की तू कहे मैं हूँ ना साथ तुम्हारे, यकीनन मेरा भी समय कल बदलेगा ईश्वर पर यकीं है, फिर साथ देने की बात करोगे तो फिर क्या ही बात होगी।। मेरे लाखोँ किये जतन सब बेकार हो रहे, जहां भी जाऊं बस मायूसी मिल रही। एक बस तेरे चेहरे की मुस्कान का था सहारा, वो भी तूने मुझसे छीन, कर लिया मुझसे किनारा। दिल को मजबूत कर के जीने का फैसला है अब, सिर्फ अपने से करेंगे उम्मीद यही फैसला है अब। कल तो मेरा होगा ही साथ मे तुम्हारा भी साथ होगा, लेकिन जो जगह आज है शायद वो अब फिर कभी नहीं।। Pari✍🏻

इंतज़ार आज भी

चलो एक दौर नया लिखते हैं, चलो एक पहल नयीं करते हैं.. तुम कर आओ भ्रमण जहां का, हम इंतज़ार फिर वहीं करते हैं.. उम्र का कोई भी भले पड़ाव हो, दिल से हमेशा जवान बने रहना.. समय भले हो कैसा भी चाहे... आदत तुम्हारी हो मुस्कुराते रहना✍🏻 यादों को सिरहाने पर रखकर सोना, फिर नींद में जाने की जरूरत नहीं होगी, बेशक गुजर जायेगी रात खुली पलकों से, लेकिन ये रात बेशुद होने से बेहतरीन होगी..! होंठ सिले थे लेकिन निगाहें बयाँ कर गयी, तुम भले चले गए लेकिन यादें रह गयी। मुझे यकीं था कि तुम आज नहीं तो कल बोलोगे, एक न एक दिन इन सिले होठों को खोलोगे.. मुझे मेरी किस्मत पर पूरा भरोसा है, इसने मुझे मेरी चाह का न कभी परोसा है... बड़ी मुश्किल से  है मेरी मुलाकात अपनो से, इसने मुझे अक्सर मुझसे भी कोसों दूर रखा है मन के एहसासों को कविता में पिरो रखा है, जज्बातों को शब्दों का स्वरूप दे रखा है। माना कि कोशिश है तुम्हारी दर्द को बयां करने की। लेकिन बेहद खूबसूरती से जीवन को लिखा है... किया है बस एक जुर्म मैंने भी जानकर, कि कर बैठा मोहब्बत तुझसे बिना सोचकर। अब हो गयी गलती लेकिन सजा इतनी बड़ी क्यों? होकर बेकसूर हर बार फिर भ...

चलो फिर अजनबी हो जाते हैं

कहो तुम अगर आज फिर से वही बात करते हैं, मिटाकर यादें सारी ..फिर अनजान हो जाते हैं। देखकर भी करेंगे फिर अब अनदेखा एक दूसरे को, कोशिश फिर अजनबी बनने की आज करते हैं।। चलो तुम भी अब आँखे फेर लेना अगर मिलो कहीं, हम भी करेंगे कोशिश तुमसे नजरें चुराने की। वो दूर दूर से देखा करेंगे फिर एक दूजे को, चलो एकबार फिर अजनबी सा फिर मिलते हैं..।। वो तुझे देखकर दूर से वापिस कहीं और मुड़ जाना, न चाहकर भी तेरी सूरत से नजरें यूँ हटा लेना। चलो यार फिर वहीं एक बार फिर टकराते हैं, अजनबी सा बन किताबों को फिर गिराते हैं।। वो चिट्ठियों का सिलसिला फिर शुरू करेंगे, झुकी नजरों से बातें फिर बेहिसाब करेंगे। चलो फिर फूलों का वो दौर फिर दोहराते हैं, चलो वो सूखे गुलाब किताब से निकाल फ़ेंकते हैं।। ©®pari

आ अब लौट चलें

बेशक मुझे भृम थे बहुत, लेकिन अब हकीकत से वाकिफ हूँ, कुछ बातों से था मैं अनजान, आज वह भी जान चुका हूँ। कल तक करता था अहम बहुत, आज वापिस जमीं पर हूँ, दूसरे के भरोसे उड़ता था जो, आज ख़ुद की उड़ान भर रहा हूँ। तुम मुझे कुछ और समझ बैठे, मैं शायद कुछ और हो चला था। बेशक थोड़ा धीमी है मेरी चाल... लेकिन मैं कभी पीछे नहीं हटा था। तुम निकल चले हो कहीं दूर आज, मुझे मालूम है तुम्हे मेरा कोई ख्याल न रहा। मैं ही पागल था तेरी यादों में डूबा था जो.. तुम्हें तो बस एक ख्याल आसमा का ही रहा।। चलो अब हम भी फिर खुदगर्ज़ हो जाते हैं, छोड़ तेरी याद को आगे को बढ़ जाते हैं। जला दीं है हमने भी तमाम तस्वीरें तेरी, चलो किताब से अब वो गुलाब भी हटा देते हैं।। ©®pari

मिजाज शायराना

लब्ज अगर तुम कुछ कह जाते हो, उत्तरदायी उसके लिए फिर तुम हो जाते हो। वादा करना और फिर कर के तोड़ देना, इस आदत से तुम क्या नहीं घबराते हो...!! मेरे लब्जों को अगर समझ सको तो, उन बातों को तुम भी चिंतन में लाना। हर बार तुम्हें समझाऊंगा साथ बिठाकर, ऐसी गलतफहमी दिल से, pari तुम मत लगाना..!! बेशक ये वादियाँ खतरों से भरी हैं, लेकिन दिल को सुकूँ भी सिर्फ यही देती हैं। शहरों की चकाचौंध से अक्सर मन भर ही जाता है, ऐसे में सिर्फ देवभूमि उत्तराखंड का ही ख्याल आता है.. नजर फेरकर तलाश तेरी हम हर ओर करते हैं, है नजरों से कहीं दूर फिर भी तलाश भरपूर करते हैं। यूँहीं एकटक नहीं देखता होगा चकोर चांद को भी। तू है पास नहीं लेकिन तेरी तस्वीर को निहारते हैं।। चंद लम्हों की जिंदगी में हमे बस मुस्कुराना है होठों मे मुस्कान और रखा मिजाज शायराना है.. ©®Pari