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रिश्ते निभा रहा हूँ...!!!

न जाने क्यों आज भी, खामोश ही जी रहा हूँ, हर आँसूं को बस यूहीं पिये जा रहा हूँ। इस सबको मेरी मजबूरी मत जान लेना, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। घुटन है साँसों में, रिश्ते-नाते टूट रहें हैं अहम की लड़ाई में, अपने छूट रहे हैं। फिर भी कोशिश सबको जोड़ने की कर रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। मेरी ख्वाईश मेरे सपनों की कोई कीमत नहीं अब, मेरा वजूद भी बस कहने भर को है अब। औरों की खुशी में बस अब खुशी ढूंढ़ रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। कट ही जायेगी ये जिंदगी अब यूहीं, ख्वाइशों को अपनी अब विराम दे रहा हूँ, कैसे बयाँ करूँ दिल की बेबसी को, मैं तो कांटों में भी बस मुस्कुरा रहा हूँ।। ज़िन्दा हूँ जब तक, ज़िम्मेदारी निभा रहा हूँ हर इल्जाम खामोशी से सहे जा रहा हूँ, जिन्दगी की कड़वाहट थोड़ी कम हो जाये, इसी कोशिश में आज भी गुड़ खा रहा हूँ।। अब मत कहना ये मैं क्या कर रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। Pari

मुझे भुला पाओगे क्या...?

मैं लिख भी दूँ अगर कहीं, कि दर्द होता है क्या, तुम उसे पढ़ने भर की हिम्मत जुटा पाओगे क्या..? महफ़िलें सजा भी दूँ कहीं मैं अगर, बैठने की उसमे हिम्मत तुम जुटा पाओगे क्या। तुम तो हो गैर हमेशा से ही मालूम है मुझे.. अपनेपन का एहसास दिला पाओगे क्या..?? छोड़कर जाओगे साथ मेरा तुम यकीनन फिर भी कुछ पल मेरे संग बिता पाओगे क्या..? मिलती है राहत बिता के फुरसत के पल तेरे संग, थोड़ी सी फुरसत आज भी निकाल पाओगे क्या..? मैं कर रहा महसूस तेरी कमी को आज बेइंतहा, इस कमी को तुम कभी मिटा पाओगे क्या...? तेरी यादों का सिलसिला है मेरे सीने में, भुला दूँ तुम्हें, कोई ऐसी दवा पिला जाओगे क्या...? मेरी कलम न लिखे तेरे बारे में कुछ भी, कोई ऐसा एहसान तुम कर जाओगे क्या..?? ©®Pari✍️

मेरी नाकामयाबी रिश्ते निभाने की

किसी की दुआ कबूल तो कोई मजबूर हुआ है, सोचा मुद्दतो बाद कोई पराया अपना हुआ है ख्वाइश तो थी तमाम खुशियाँ तुझपे लुटाने की, जितना प्यार किया तुझे तू उतना ही दूर मुझसे हुआ.. यक़ीनन मैं तेरे काबिल न था, ये तो जान लिया था मैंने, लेकिन फिर भी अनजान बन हर पल तेरे पास मैं रहा। मैंने कभी सोचा तक नहीं कि तुझसे दूर मैं जाऊं कभी, लाख कोशिशों के बाद भी तू मेरे करीब आज न हो सका।। दोष सिर्फ एक ही मेरा की मोहब्बत बेपनाह मैं करता हूँ, खुद की खुशी से पहले बस तेरी खुशी मैं खोजता हूँ। लेकिन तुम सही हो हर बार मेरा यही है मानना, क्योंकि कमियों के पिटारा मैं ही तो हूँ इस जग में।। एक आवाज पर तुमने सबको मेरे लिये छोड़ था दिया, ऐसा बलिदान जो मेरे लिए सबसे बड़ा था तुमने किया। मेरे हर अपने को अपना समझ गले था लगाया तुमने, औऱ मैं हार गया कोशिशों में, देने की खुशियां बेसुमार तुझे...!! Pari

मौका परस्त लोग जहाँ के

 मानवता का अंत नहीं तो और क्या हो सकता है मौतों की मंडी में भी क्या पैसों का व्यापार चलता है। मजबूरी में पड़े है मानव आज इस महामारी में, कुछ बहसी लगें है आज भी दलाली की तैयारी में।। फर्क नहीं पड़ता कि कोई मरता है या फिर जीता है, 10 रुपये का मास्क भी यहाँ 300 में बिकता है। जोड़ लिये है ढेरों पैसे, लाशों की तुमने दलाली में, लेकिन याद रखो जेब नहीं होती कफ़न की सिलाई में। कहीं ऑक्सीजन, कहीं एम्बुलैंस, कहीं बिस्तर बिक रहे, गरीबी की मार में कहीं लोग सड़कों में भी मर हैं रहे। आज का दिन कट गया, कल क्या मंज़र होगा पता नहीं, आशाओं के दीप जल रहे, जीवन दीपक का पता नहीं।। मेरी भी अभिलाषा है कि मेरा भी प्रयास बना रहे, मुश्किल की इस घड़ी में हर धरतीवासी टिका रहे। क्या अमीर क्या गरीब, मुश्किल घड़ी नहीं जानती है, इंसानियत बनी रहे बस, मुसिबत तो आती जाती है।। ©®Pari✍️

तुमसे है जिंदगी

 माना कि भावनाओं में बहना ठीक नहीं, लेकिन बिना इनके जीना भी मुमकिन नही। सोचा तो अक्सर मैं भी करता हूँ इस बारे में, कि न लिखूँ कभी भावनाओं को सामने रख के।। मैंने भी की मोहब्बत बेइंतहा किसी एक से, कद्र उसी को सबसे कम हुयी मेरे प्रेम से। सब कुछ नजरअंदाज कर जिसे लगाया गले से, वही बांह निकली मेरे लिये कमजोर सबसे।। राहत की चाहत में आँख बंद कर भरोसा कर लिया, मैंने तो ताउम्र का जैसे सुख एक साथ पा लिया। अकाबक्की में फैसले कर लेता तो ठीक था शायद, सोच समझकर जैसे मैंने कुछ पाकर भी खो लिया।। मैं तो बस करता रहूँगा तुमसे वफ़ा एकतरफा ही सही, सितम भी बिना उफ सह लूँगा मैं बेवजह ही। मेरी हर प्रार्थना में तेरी ख़ुशी ही बरकरार रहेगी, तू मुस्कुरा ले बस चाहे कीमत मेरी जान भी होगी। ©®pari

बेजान हूँ तुम बिन

बामुश्किल से मुस्कुराने की कोशिश करता हूँ, कुछ पलों के लिये खुश होने की कोशिश करता हूँ। आता है वही दौर अश्रुओं का फिर लौटकर, दिलाने मुझे मेरी किश्मत का गम याद फिर से। कोशिश तो बहुत की हर किसी का खास होने की, दबाकर हर गम अपना साथ सबके मुस्कुराने की। लेकिन मैं भी लड़ता कब तक अपने नसीब से, मांगकर जो लाया था ज़िन्दगी सिर्फ रुलाने की।। सब रिस्तों को मैं अकेला तवज्जो देता रहा बस, सबके होठों पर मुस्कुराहट लाने को लड़ता रहा बस। मेरा अपना वजूद मिट गया, मैं बिसरा सा दिया गया, जैसे मूरत हूँ मैं भी कोई बनी पुराने पाषाण की।। मेरा गर्व मेरा अहम था जो वो भी रुठ गया, मेरी मुस्कुराहट ही मुझे आँशु थमा गयी अब तो, अब तो बिन एहसास जैसे बेजान हो गया हूँ, जान है शरीर में लेकिन भावनाओं से बेजान हूँ।। Pari

मेरी मुस्कान मेरी पहचान

क्या करें क्या न करें, क्यों ऐसी स्थिति पैदा हुयी है, अधिकारों का उपयोग जो, सही से नही किया है। देखभाल कर भी तुमने गलत निर्णय जो लिया था, दोष अब देना क्यों, खुद गलत व्यक्ति तुमने चुना था।। जात पात की होड़ में, काबिल को तुमने चुका दिया, अहम अपना आज दिखाने को, कल तुमने ठुकरा दिया। पाछ पछताये निरर्थक है, समय से जो जागे नहीं, निश्चित है आज हार तुम्हारी, समय पर जो भागे नहीं।। अवसर का क्या है वो तो, आकर फिर चला जायेगा, आँख मूंद जो बैठे तो, क्या समय वहीं ठहर जायेगा। रात के बाद सवेरा है लेकिन, उसपर सबका अधिकार नहीं, वैसे ही धोखेबाजों को, जग में मिलता फिर सहर नहीं।। मैं तो आज यहाँ हूँ लेकिन, फिर कल कोई और होगा, मेरे जैसी सोच फिर होगी, इसपर तो बस संशयः होगा। मेरी मुस्कान कोई व्यंग्य नहीं, लेकिन कुछ को चिढ़ाती है, लाख षड्यंत्रों के बाद भी, मेरी होंठों से ये नहीँ जाती है।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything