मेरी नाकामयाबी रिश्ते निभाने की
किसी की दुआ कबूल तो कोई मजबूर हुआ है,
सोचा मुद्दतो बाद कोई पराया अपना हुआ है
ख्वाइश तो थी तमाम खुशियाँ तुझपे लुटाने की,
जितना प्यार किया तुझे तू उतना ही दूर मुझसे हुआ..
यक़ीनन मैं तेरे काबिल न था, ये तो जान लिया था मैंने,
लेकिन फिर भी अनजान बन हर पल तेरे पास मैं रहा।
मैंने कभी सोचा तक नहीं कि तुझसे दूर मैं जाऊं कभी,
लाख कोशिशों के बाद भी तू मेरे करीब आज न हो सका।।
दोष सिर्फ एक ही मेरा की मोहब्बत बेपनाह मैं करता हूँ,
खुद की खुशी से पहले बस तेरी खुशी मैं खोजता हूँ।
लेकिन तुम सही हो हर बार मेरा यही है मानना,
क्योंकि कमियों के पिटारा मैं ही तो हूँ इस जग में।।
एक आवाज पर तुमने सबको मेरे लिये छोड़ था दिया,
ऐसा बलिदान जो मेरे लिए सबसे बड़ा था तुमने किया।
मेरे हर अपने को अपना समझ गले था लगाया तुमने,
औऱ मैं हार गया कोशिशों में, देने की खुशियां बेसुमार तुझे...!!
Pari
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