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कर्मों का फल

प्रकृति को दे रहे दोष, अपने कर्म नहीं देख रहे, वाह रे मानव कैसा है तू, मतलव का भंडार भरा, दोहन करता नित प्रकृति का, न कभी ख्याल रखा, अब जब लगी चोट तो, फूट फूट क्यूं तू अब रो रहा।। मन की मंशा रखकर मन मे, दिखावे का खेल चल रहा, नियत में भरकर लोभ, बात परोपकार की कर तू रहा। खुद को जानकर सबसे ज्ञानी, सबको मूर्ख समझ रहा। नहीं चलेगा ये चरित्र तेरा, क्यों पापों को सजों रहा, पिया दूध जब गाय तो फिर, बछड़े का क्यों त्याग किया, बिन बछड़ों के जग मे मानव, गायों का क्या अस्तित्व रहा। समय बदल जब कल आएगा, कर्मो को सामने लाएगा, बेकाम हो चले मानव को भी, बस तिरस्कार मात्र मिलेगा। पेड़ काटे अनंत तो फिर क्यों नव पौध का न ख्याल किया, माना थी जरूरत तेरी, भविष्य का क्यों ख्याल न आया, आज की ख्वाइश पूरी कर दी, कल का न ख्याल रखा, अब जब मुसीबत आन पड़ी, फिर क्या तू अब कर है सका।। क्या लेकर आये थे जग में, क्या लेकर फिर जाना होगा, कर्मो की गठरी के अलावा, सब यहीं बस त्यागना होगा। फिर न मिलेगा मौका दूजा, भोगना तब कर्मों को होगा, परी की कल्पना बस इतनी सी, निष्पाप जहाँ में रहना होगा। Pari ©   ®...

थोड़ी फिक्र, थोड़ी मुस्कान

सिर्फ चेहरा देखकर मोहब्बत नहीं हो जाती, यूहीं किसी के संग जिंदगी नहीं बितायी जाती। विश्वास संग ही बनते है जन्म जन्मों के रिश्ते, सिर्फ साथ रहने से कोई दिल में नहीं बस जाते।। ख्यालात और सवालात भी मिलने जरूरी हैं, सिर्फ जवाब एक से होना काफी नहीं होता। सालों कदम मिलाकर चलने का वादा काफी नहीं, कदम कदम पर साथ होना भी जरूरी है होता।। उम्मीद रखना कि समझे बिना बोले ही कोई, एहसास हो जाये उसे मेरा बिना पलक खोले ही। माना कि ये सब मोहब्बत की निशानी हो सकती है.. लेकिन फासले दूर होते हैं आखिर होठं खोलने से ही।। मुस्कुरा दो कितना भी तुम भले सामने किसी के, आँसू सिर्फ किसी खास के पास ही निकलते हैं। फिक्र होगी तुम्हारी भी शायद दुनिया मे सभी को, लेकिन बेवजह परवाह करे ऐसा होना कम ही है।। कोशिश कीजिए कि थोड़ी मुस्कान कमा सको तुम, कुछ लम्हें मुस्कान के दुनिया मे बाँट संको तुम..! यकीन मानो कुछ खास होने का एहसास होगा स्वतः ही, निःस्वार्थ किसी की मदद में बढेंगें  हाथ जब स्वतः ही..!! Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

जीवन का आधार, महिलाओ को मिले अधिकार

नारी का जीवन है जीना, जैसे स्वयं हलाहल हो पीना, अनेकों कष्ट भले हो लेकिन, कोशिश कर मुस्कुराते रहना, नहीं किसी से कोई अपेक्षा, मौन रहकर ही कर्म है करती, मन की मंशा मन मे रखती, प्रेम ही प्रेम जीवन मे है भरती। राह कठिन है चलना मुश्किल, लेकिन तुम चलती इसपर निशदिन, घर हो या फिर दुनियादारी, सबका रखती ध्यान है प्रतिपल, बेटी, बहन, पत्नी, बहु और फिर माँ का तुम रूप हो रखती, रखना ख्याल सबका प्राथमिकता, और संग अनेको कष्ट हो सहती। चाहे हो कितनी बाधाएं, उनसे पार तुम हो पा जाती, परचम विश्व पटल पर अपना, निशदिन ही तुम हो लहराती। शिक्षा, खेलों का क्षेत्र हो या फिर देशप्रेम की हम बात करें, चहुँ ओर है लहर तुम्हारी, चाहे कहीं भी हम नजर धरें।। महिलाओं का योगदान, धरती पर है बहुत महान, शब्दवाली में शब्द नहीं, जिनसे हो सके तो इनका बखान। फिर कुछ शब्द हैं चुने, कोशिश करने की तुम्हारी प्रसंशा, हर जगह महिलाओं का हो सम्मान, मन मेरी यही है मंशा।। जीवन का है जो आधार, मिले सम्मान उसे हर बार, प्राथमिकता हो हमारी भी, मिले महिलाओं को अधिकार।। Pari ©   ® Pari.... Love ...

अल्फाज मोहब्बत में

मोहब्बत में हर अल्फाज कहे नहीं जाते, दिल की चाहत को शब्द दिये नही जाते। सम्मान और समर्पण ही मोहब्बत है, अंजाम मोहब्बत में सोचे नहीं जाते।। मोहब्बत की परिभाषा बस इतनी सी समझ आयी, मुझे मोहब्बत है तुमसे और यही बस है सच्चाई। अगर करो प्यार तुम भी हमसे तो अच्छा है, नहीं तो हर सांस हमारी वैसे भी तुम्हारी ही है। कह सको तो कह लेना क्या तुम्हारा ख्याल है, बेझिझक मोहब्बत है या फिर कोई सवाल है, लाखों उलझने और परेशानियां तो है मगर, मोहब्बत में साथ चलने की बात ही कुछ और है। फिर भी कह देतें हैं एक बार तुमसे फिर हम, तुम ही हो ख्वाइश और तमन्ना हमारी हरदम। बेइंतहा मोहब्बत है तुमसे यही आखिर सच होगा, तुम ही हो जीवन मेरा, तेरे सिवा अब न कोई और होगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

राष्ट्रहित सर्वोपरि

विश्वगुरू कहलवाते थे कल तक, आज बेवकूफ नजर आते हैं, बिना सोच समझ कर हम भी देखो, भेड़ चाल सी चलते जाते हैं। कुछ असामाजिक मिश्रण मिल गये, और हम भी उसमे घुलने लगे, सालों की अहिंसक परंपरा छोड़, हिसंक न जाने क्यों हम होने लगे। खुद पर अब बिस्वाश नहीं है, दूजे की बुद्धि से सोचने लगे, सवाल पूछते फिर रहें हैं, पर सवाल खुद नही हम समझ रहे, मैंने भी खुद से एक सवाल किया, तुम्हें भी समझ आये तो बतलाना, खुद के होने की मुझे खबर नहीं, तो क्या ठीक नही है मर जाना।। राह तो मुश्किल होगी ही, सच की राह जो चुन ली है, राक्षस उपद्रव करेंगे ही, यज्ञ की अगर तुमने ठानी है। फिर भी तुम निडर बढ़े चलो, झूठ से प्रदा उठने वाला है, कुछ संहार होने जरूरी है, अगर रामराज तुम्हे लाना है।। चंद जयचंदों के होने से, देश की आभा मिट सकती नहीं, देशविरोधी नारों से अब, देशभक्तों की गिनती घटती नही। मिलजुल कर हम साथ हैं सब, बस थोड़ा संयम रखना बाकी है, भूत पिचास सब भागेंगे अब, पंचजन्य की हुंकार आनी बाकी है। मेरा प्रयास है तुन्हें जगाना, तथ्यों संग सच को दिखलाना, पहले जानो, बूझो, फिर तोलो, तब जाकर तुम निर्णय करलो। सही दिश...

जीवन वर्दी का

न कोई फिक्र न कोई चिंता मन मे मेंरे घर करती, मेरी रक्षा में हर पल एक वर्दी जो तत्पर है रहती। बड़े सुकूँ से जीवन जीते दिन रात की हर पहर में, मेरी रक्षा में खड़ी है सोच, हर वक्त एक वर्दी शहर में।। बेफिक्र निकलता हूँ घर से, निशदिन निडर होकर जब भी, वजह तुम ही हो सच कहता हूँ, होता नहीं मुझे डर कभी। रहते हो अटल खड़े तुम, कड़ी धूप, वर्षा या फिर हो सर्दी, आसान इसे तुम मत आँकना, यूहीं पहन लो जो तुम वर्दी।। अनन्य संकट हो चाहे या कोई कष्ट तुम्हें घर कर जाये, सीना ताने फिर भी आगे आये वही तो हो तुम वर्दी वाले। निज स्वार्थ से पहले, निस्वार्थ सेवा का मन भाव जो रखते हैं, वही मानव तो निश्छल होकर सेवा मे वर्दी पहनते है।। ऐसा जीवन ऐसी मंशा प्रत्येक मानव में अगर घर कर जाये, जन जन में खुशहाली और देश स्वतः खुशहाल हो जाये। मेरी भी एक कोशिश होगी, सर्वजन हिताय सोच रखूँ, नमन करूँ इस वर्दी को, जीवन मे सब को मुस्कान दे पाऊँ।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

हम तुम फिर से

यूहीं आज बैठा था जो मैं तन्हा फिर से, चली आयी तेरी यादों की वो लहर फिर से। ठहर ठहर फिर हिचकियों का सिलसिला शुरू हुआ, जैसे याद हो किया तुमने और मैं मुस्कुरा फिर दिया।। क्यूँ न जाने आज भी तेरी खुशबू जहन में बाकी है, तुम पास न सही लेकिन यादों की सिहन बाकी है। वक्त बेवक्त छलक ही जाते हैं नीर आँखों से अक्सर, तेरी बिछड़न की वो रात अभी भी बाकी है।। कोई किस्सा न बना और न ही कोई कहानी लिख पाया, फिर भी तुम्हें वर्षों बाद भी दिल से न निकाल पाया। न जाने कैसा रिश्ता था जो लाख चाहकर भी नहीं टूटता, कहीँ भी रहूँ यारा लेकिन तेरी यादों का कारवाँ नही छूटता।। मन में कोई ख्वाइश उठती है आज भी अगर कभी, शुरुआत फिर तेरी चाहत से होती है फिर सभी। माना कि मुकम्मल नहीं होती है चाहतें जहां में अक्सर, देखो नादान दिल तुम्हें ही मांगे ख्वाइश में एक बार फिर।। मेरी हर कोशिश हर वक्त बेबुनियाद ही साबित होती रही, जब जब तुझसे दूर जाने की मैंने चाह मन मे भरी। शायद ये बँधन तुमसे कई कई जन्मों से चलता आ रहा होगा, इसलिए हर बार मेरे जीवन का हिस्सा तुम्हें बना रहा होगा।। Pari ©   ® Par...