संदेश

उठाओ तलवार फिर रानी लक्ष्मीबाई

कैसे चुप हम रह सकते हैं, कैसे सब चुप सह सकते हैं, खुद को सिहँ बताने वाले, कैसे हम सहम सकते हैं। नारी प्रधान नारी सम्मान, सिर्फ नारों तक सीमित होगा क्या? बड़ी बड़ी बातों से ही,  निर्भया को इंसाफ मिलेगा क्या? परंपरा सी बनती जा रही, दो दिन कैंडल मार्च निकालने की, फिर सब भुला देते हैं, जैसे पूरी हो चली हो ज़िम्मेदारी सी। इंसाफ मांगना आदत है, इंसाफ करने की आदत डालनी होगी, नारी के सम्मान के लिये, रानी लक्ष्मीबाई सी हुंकार लगानी होगी। स्वयँ हमे ही लड़ना होगा, हाथोँ में तलवार लिये, शीश धरा को चढ़ाने होंगे, सभी धरा के कातिलों के। बहुत खेल लिया धर्मनिरपेक्ष का खेल, बहुत बन लिए सेक्युलर, हम जैसे थे वैसे अच्छे, अब धर ला दो अत्याचारियों का सर। विनम्र निवेदन है मेरा आज, कानून के सब रखवालों से, छोड़ दो पैरवी करना अब तुम, अपनी माँ बहनों के कातिलों के। एक जुट होकर अपनी पहचान बताओ, सजा दिलाओ उन बेरहमो को, जिनसे लज्जित हो रहा समाज, फाँसी पर लटकाओ उन हरामियों को। pari

प्रेम ही जीवन सुख है

कलम उठायी फिर से आज, दिन बीते हैं बिन अनेकों साज, मन व्यथित था कुछ रोज से, शायद तेरी बिछड़न की सोच से। हिम्मत कर फिर कलम उठायी, खोला एक फिर पन्ना आज, लिख डालूँ सब मंशा मन की, लिख डालूँ दिल के सब राज।। प्रेमवश होकर सबको अपना जाना, प्रेम ही सबको बाँटा निशदिन, प्रेम भाव से कर्म किये हैं, मनुष्य मिले जीवन मे भिन्न भिन्न। पिरो दिये थे मोती अनंत कुछ मंगलमय की कामना में, पग पग पाँव रखे फिर संभल, ज्यों छाले हो पांव में।। फिर से होगा नव सवेरा जीवन में, उम्मीद तिमिर के जाने की, प्रेम के गीत रचे फिर मैंने, आस प्रेम जगत को पाने की। राह कठिन है माना मैंने, लेकिन निष्चय मेरा भी अटल होगा, प्रेम ही जीवन का अनन्त सत्य है, प्रेम ही मेरा धर्म भी होगा।। मेरी हर कृति में प्रेम दिखेलु, सर्वजन हिताय संदेश दिखेलु। अपना पराया सीमा छोड़, परोपकार से नाता होगा, मेरी हर ख्वाइश में प्रेम मिलेगा, मेरी हर इच्छा में प्रेम दिखेलु। तुम भी कोशिश अनुसरण करना, जीवन मे बस प्रेम ही भरना। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

तोलो फिर बोलो, प्रेम रस जीवन मे घोलो

सलवटें पड़ ही जाती है रिश्तों में अक्सर एक वक्त पर, बेवजह जब गिले-शिकवे जमा कर जातें हैं हम जहन पर। कुछ कहना है तो कहो, लेकिन पहले उस बात की गहराई समझो, खुद के दिल से जोड़ों बात को, फिर कहीं उसका रस घोलो। स्वयं ही तुम स्वयं को समझा लोगे, अगर शब्दो का सही चुनाव कर लोगे, गिले शिकवे स्वतः ही मिट जाएंगे, पराये भी अपने ही लगने लगेंगे। दिल सबका दुःखता है, शब्द सबको घायल करते हैं, कोई रो जाता है सुनकर, किसी की मुस्कान दिखती है। बेवजह ही ग्रीष्मकाल का अनुभव करना ठीक नही होता, शांत और शीतल मन ही सुख का आभास कराता है।। शब्दों का तुम जरा ख्याल रखना, पहले तोलना फिर बोलना, मुकाम हासिल होगा जरूर तुम्हें, बस अकाश के साथ जमीं का भी ख्याल रखना। संयम संग मुस्कान की अलग होती है पहचान, ख्याल रखो अगर सबका, अलग दिखेगी तुम्हारी शान। तेरा मेरा मत करना, सब दुनिया मे है मायाजाल, प्रेम ही जीवन प्रेम ही ईश्वर, दुनिया मे बस एक मिशाल।। शब्दों का चयन करना एक कला है, और इस कला में माहिर हर कोई नहीं, सोच समझकर उपयोग करना, शब्दों का अपना कोई रोल नहीं। किस्से कहानियां तो बन ही जाएंगी, तुम उम्रभर...

मेरी वाईस मेरी चॉइस

सिर्फ चुनाव की बात नहीं, बात करो अधिकारों की, वादों से कुछ नहीं होगा, ताकत दिखाओ तुम इरादों की। मैं मैं करती बकरी मर गयी, नहीं कोई आवाज है सुनता, नेक इरादे और दृढ़ संकल्प, सिर्फ व्यकितत्व में है दिखता।। जीत की ख्वाइश लेकर तो, सब किस्मत आजमाते हैं, विकास की लेकिन ख्वाइश भुलो, कुछ ही बस रख पातें हैं। बरसाती मेढक बनकर जो, सिर्फ चुनावों में ही दिखतें हैं, सोचो जरा तुम एक बार, क्या वो फिक्र तुम्हारी करते हैं।। बात नही ये चॉइस की है, बात है दिदो आजमाइश की, कुछ पल का ये खेल नहीं, कोशिश है ये सालों की। तेरा मेरा नहीं है इसमें, बात होनी है फिर हम सब की, दारु मुर्गा बुगटया नहीं, होनी दौड़ है फिर सबके विकास की।। कच्ची पक्की सब देख ली, देख ली देशी विदेशी सब, जो बात करेगा मेरे हक की भुला, वोट मिलेगा उसको अब। रातों के अंधेरे में आते है जो, उनके लिए एक बात है मेरी, उजालों में अब बात करो, नहीं तो पड़ेगी लठ बिना होकर देरी।। Pari

मेरा नेता मेरा ग्राम निवासी

थोड़ा सा हम जागे हैं, थोड़ी सी और जरूरत है, क्यूँ हम दें साथ तुम्हारा, पूछने की अब जरूरत है। सालों से बस चुपकर थे, आवाज बुलन्द अब करो जरा, वोट तुम्हारा मांगे जो भी, लक्ष्य उसका पहले पूछो तुम।। पैसा रुतबा मत देखना तुम, रौब से भी मत डरना तुम, सोच भविष्य की रखना और, चेहरे बच्चो के देखना तुम। दूरदर्शिता है किसमें भरी, जन कल्याण की है भावना, मतदान केन्द्र जाने से पहले, खुद से ये सवाल तुम करना।। पहुँच में हो हर जरूरत में, बेझिझक तुम उससे बात कर सको, जात पात से उठकर भी, न्याय निहित तुम उससे ले सको। सुख दुःख में जो साथ रहेगा, निवास गाँव जिसका बना रहेगा, निश्चित ही है मित्रो मेरे, ग्राम विकास सिर्फ वही कर सकेगा।। मेरी है एक व्यक्तिगत राय, जिससे मिले हम सबको न्याय, मेरा नेतृत्व वही कर सकेगा, हरपल जो मेरे साथ खड़ा रहेगा। ऐसा होना तभी है संभव, जब मेरा नेता मेरे गांव में रहेगा, मेरे हित में अपना हित खोज, ग्राम विकास वो कार्य करेगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

एक चुनाव विकास का

नवयुग का निर्माण करेंगे, नयी सोच को देना मौका होगा, तोड़ परम्परा यारी दोस्ती, विकास का अब विचार होगा। बहकावे बहुत हो चले, अब मुद्दों पर जो बात करेगा। हो चलना संग तुम उसके, जो समाज विकास की बात करेगा। छोटी छोटी जरूरतें है अपनी, लेकिन बहुत जरूरी हैं सालों से है नेता चुन रहे, क्यों फिर भी सब अधूरी हैँ। सिर्फ हाँ में हाँ मिलना काफी नही, अब आवाज उठानी होगी, चुनाव उसी का करना तुम अब, जिसकी सोच सच्ची होगी। वादों का वक्त चला गया, अब ज़मीन से जुड़ाव देखेंगे बड़ी बड़ी बातों से नहीं, हकीकत का सामना करेंगे, योग्यता का आधार देखेंगे, व्यक्ति की क्षमता देखेंगें, परदेशी है? या पडोसी, गाँव मे उसका घर देखेंगे। दारू मुर्गा नही चाहिए, ना ही खायेंगे बुगट्या हम न कोई अब प्रलोभन चाहिए, नोट पर बिकेंगे न अब हम। सही दिशा और सही राह पर, बच्चों का हम भविष्य चुनेंगे, आओ मिलकर प्रण करो, अब निष्पक्ष और सही चुनाव करेंगे।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 14

यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...