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मेरी वाईस मेरी चॉइस

सिर्फ चुनाव की बात नहीं, बात करो अधिकारों की, वादों से कुछ नहीं होगा, ताकत दिखाओ तुम इरादों की। मैं मैं करती बकरी मर गयी, नहीं कोई आवाज है सुनता, नेक इरादे और दृढ़ संकल्प, सिर्फ व्यकितत्व में है दिखता।। जीत की ख्वाइश लेकर तो, सब किस्मत आजमाते हैं, विकास की लेकिन ख्वाइश भुलो, कुछ ही बस रख पातें हैं। बरसाती मेढक बनकर जो, सिर्फ चुनावों में ही दिखतें हैं, सोचो जरा तुम एक बार, क्या वो फिक्र तुम्हारी करते हैं।। बात नही ये चॉइस की है, बात है दिदो आजमाइश की, कुछ पल का ये खेल नहीं, कोशिश है ये सालों की। तेरा मेरा नहीं है इसमें, बात होनी है फिर हम सब की, दारु मुर्गा बुगटया नहीं, होनी दौड़ है फिर सबके विकास की।। कच्ची पक्की सब देख ली, देख ली देशी विदेशी सब, जो बात करेगा मेरे हक की भुला, वोट मिलेगा उसको अब। रातों के अंधेरे में आते है जो, उनके लिए एक बात है मेरी, उजालों में अब बात करो, नहीं तो पड़ेगी लठ बिना होकर देरी।। Pari

मेरा नेता मेरा ग्राम निवासी

थोड़ा सा हम जागे हैं, थोड़ी सी और जरूरत है, क्यूँ हम दें साथ तुम्हारा, पूछने की अब जरूरत है। सालों से बस चुपकर थे, आवाज बुलन्द अब करो जरा, वोट तुम्हारा मांगे जो भी, लक्ष्य उसका पहले पूछो तुम।। पैसा रुतबा मत देखना तुम, रौब से भी मत डरना तुम, सोच भविष्य की रखना और, चेहरे बच्चो के देखना तुम। दूरदर्शिता है किसमें भरी, जन कल्याण की है भावना, मतदान केन्द्र जाने से पहले, खुद से ये सवाल तुम करना।। पहुँच में हो हर जरूरत में, बेझिझक तुम उससे बात कर सको, जात पात से उठकर भी, न्याय निहित तुम उससे ले सको। सुख दुःख में जो साथ रहेगा, निवास गाँव जिसका बना रहेगा, निश्चित ही है मित्रो मेरे, ग्राम विकास सिर्फ वही कर सकेगा।। मेरी है एक व्यक्तिगत राय, जिससे मिले हम सबको न्याय, मेरा नेतृत्व वही कर सकेगा, हरपल जो मेरे साथ खड़ा रहेगा। ऐसा होना तभी है संभव, जब मेरा नेता मेरे गांव में रहेगा, मेरे हित में अपना हित खोज, ग्राम विकास वो कार्य करेगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

एक चुनाव विकास का

नवयुग का निर्माण करेंगे, नयी सोच को देना मौका होगा, तोड़ परम्परा यारी दोस्ती, विकास का अब विचार होगा। बहकावे बहुत हो चले, अब मुद्दों पर जो बात करेगा। हो चलना संग तुम उसके, जो समाज विकास की बात करेगा। छोटी छोटी जरूरतें है अपनी, लेकिन बहुत जरूरी हैं सालों से है नेता चुन रहे, क्यों फिर भी सब अधूरी हैँ। सिर्फ हाँ में हाँ मिलना काफी नही, अब आवाज उठानी होगी, चुनाव उसी का करना तुम अब, जिसकी सोच सच्ची होगी। वादों का वक्त चला गया, अब ज़मीन से जुड़ाव देखेंगे बड़ी बड़ी बातों से नहीं, हकीकत का सामना करेंगे, योग्यता का आधार देखेंगे, व्यक्ति की क्षमता देखेंगें, परदेशी है? या पडोसी, गाँव मे उसका घर देखेंगे। दारू मुर्गा नही चाहिए, ना ही खायेंगे बुगट्या हम न कोई अब प्रलोभन चाहिए, नोट पर बिकेंगे न अब हम। सही दिशा और सही राह पर, बच्चों का हम भविष्य चुनेंगे, आओ मिलकर प्रण करो, अब निष्पक्ष और सही चुनाव करेंगे।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 14

यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...

मेरी कविता मेरे शब्द

मैं यूहीं तो शब्द संजोता नही था, शायद कोई किताब होना बाकी थी, वक्त बेवक्त कुछ लम्हें लिखता था, फिर यादें जो अताह बनानी थी। कुछ जज्बातों को उतारा है मैंने, कुछ को यूहीं भुलाना सही समझा, जो दे दिलो को सुकूँ संजो दिया, बेचैनी को बस स्वयं तक सीमित कर दिया। आये फिर लम्हें कुछ ऐसे भी, मन मेरा भी हुआ प्रफुल्लित, आशाओं का ज्वार उठा, देख मेरा मन हुआ प्रशनचित। कोई सुन्दर सा सपना फिर, मेरी भी निंद उड़ा गया, कुछ अच्छा लगा मुझे भी फिर ,जैसे जीवन का रुख गया। कुछ लम्हों को संजोने की कोशिश थी, कुछ अनचाहे लम्हें मिल गये, दिल की चाहत पूरी न हुयी, कुछ अपने न जाने कहाँ खो गये। बेकल ही होती है पूरी ख्वाहिशें, बाकी सब सपना ही बना रहता है, पल पल समय गुजरा जैसे रेत हाथों से, बस काश बाकी बचा रहता है। मेरी हर पंक्ति का हर शब्द मेरी कहानी होगा, ये जरूरी तो नही होगा, लेकिन मेरे अनुभव मेरी कल्पना को जरूर कविता का रूप देगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 13

शब्दों का प्रयोग किया जिसने, शब्दो की मर्यादा रखकर। इंसान वही है जीवित जग में, व्यंग्य करे जो अपनी मर्यादा में रहकर।। मेरी मासूमियत को मेरी कमजोरी समझ गए वो, वादा जीने मरने का कर यूहीं तनहा छोड़ गए वो। तोड़ दो खामोशियों का सिलसिला अब तुम भी, लो अब मान गये हम और हो चले अब तुम्हारे। खता होउसी शख्स को मेरे हिसाब से, दिल मे छुपे होंगे राज जिसके बेहिसाब से। चिलचिलाती धूप में भी आराम नही करता, दिन हो या रात भरसक प्रयास है करता। थोड़ा संभल कर शब्द चुनना यारो तुम, तुझे पालने को कोई हर कष्ट है सहता।। मैं लिखूं तुझे अपनी गजलों मे, या फिर तेरा जिक्र शायरी में हो मेरी। सब बेवजह का ही फलसफा होगा, अगर तेरा दिल न इससे वाकिफ होगा।। क्यों न जाने रह रहकर तुम मुझे याद आती हो, थोड़ा सुकूँ और बेचैनी बेहिसाब दे जाती हो। चोट मुझे जब लगे कभी, तो दर्द तुम्हीं महसूस करती हो। मेरी हर कामयाबी पर मुझसे ज्यादा, सिर्फ मेरी माँ तुम खुश होती हो।। कुछ खैरियत खुद की भी पूछ ले ऐ ज़िंदगी, बरसों से चली जा रही है तू, बिना कोई सवाल किये। हरे भरे खेतों कों कर बंजर, मैं सीमेंट में पौधे रोपने लगा हूँ,...

देशहित पहला कर्तव्य

अक्सर मैं भी मुस्कुरा देता हूँ, हालत खुद की देखकर, देशभक्त बन बैठे हैं कुछ आज, ईमान खुदका बेचकर। कृपा करना अपनी केशव, बचे रहे इंसानियत जहाँ में, मतभेद रखना आपस में पर, मनभेद का खेल न खेला जाये।। सत्ता के गलियारों का, स्वाद सभी को है भाता, लजीज बिरयानी खाने को, हर सयाना है यहाँ आता। गर्दन तक हो कीचङ में सने, फिर भी कुर्ता है चमकाता, लाखों करोड़ो चटकर जाता, और मजाल जो एक डकार हो आता। मैं ही सच्चा मैं ही काबिल, बस एक दौड़ है जैसे ओलम्पिक की, कुर्सी के लालच के खातिर, होड़ लगी है बस नींचपन की। कोई चोर तो कोई सिपाही, खुद को सर्वोपरि समझते हैं, लोकतंत्र के स्तंभ है जनता, वादों से निशदिन उसको भरमाते हैं।। लेकिन हमको क्या करना है, लड़ने दो नेताओ को, मुफ्त में कोई भीख जो दे दे, खा जाओ बस चुपकर के। देशहित से हमें क्या लेना है, अपना स्वार्थ सिद्द होना जरूरी है, धिक्कार है ऐसे लोगो पर , जिनके लिये देश ज्यादा चमचागिरी जरूरी है। ताज्जुब नहीं है कुछ भी, पढ़े लिखे तो ज्यादा अनपढ़ है, सच दिखता है सामने फिर भी, आँखों मीच हो रहे अंधे हैं। सही सोच और सही निर्णय अगर, लेने की तु...