Posts

मेरु ज्यू मेरु प्राण, मेरु गांव मेरु मुल्क

कन भलु प्यारू मेरु उत्तराखंड, कन भली हमरी बोली भाषा, कतगा भला हमरा रीति रिवाज, कतगा हमरू प्यारु समाज च खास। बनि बनी का यख रंग रूप छन मिलदा, बनी बनी का यख बिचार, कखी बीरों कु संगर्ष च यख, त कखी प्रेम की गाथा च अपार। ऋतु बितीन बीती गैनी साल, सैंणा बाटा भी देखा हुयान भ्याल, गौला लगी भिटे जांदा छाई जू, आज वी नॉला पंदेरा पूछण लग्यान सवाल। कनु कै की तिन मुख मोड़ी हमसे, कनु कै तिन हमथै बिसराई, आँख्यू मा क्या आंसू नी आया तेरा, कनू कै त्वे पिडा भी नी ह्वाई।। बांजा पोड़ीन सेरा पुंगडा जब त्यारा, तेरी गाती का कांडा नी चुभिन, छोड़ी की गई जब तू स्वर्ग तब, तेरी खुटयूं मा ग्वाला नी पोड़ीन। कख छन तेरा अपना बिरणा बोला, कख च तेरू मान सम्मान, किले इतगा निर्मोही तेरू ज्यू ह्वे, कख तेरू हर्ची बल वो इमान। दिन बीती जाला बिती जाला साल, कुछ गौं खाली ह्वेन कुछ होला भ्वाल, कुछ आज चिंतित छन कुछ भोल होला, पर क्या मिललु कैरी की बस सवाल? मेरी सोच मेरु प्राण आज भी बस्युं च बस मेरा गों मेरा पहाड़ मा, ब्याली भी छाई और भोल भी रौलु मी प्रयासरत, अपडा मुल्क का पुनः निर्माण मा। Pari ©   ® Pari.... ...

ख्याल ख्याल में2

प्यारी सी भोर हो और मुस्कान संग आत्मविश्वास हो, दिल में तमन्नाओं का सैलाब आंखो में कोई ख्वाब हो। वक्त यूं तो गुजर जाता है तनहा भी अक्सर, संग तनहाई कोई अपना साथ हो तो क्या बात हो।। मै यूहीं देखता रहूं तुम्हे उम्रभर ऐसे ही, तुम भी बैठी रहो मेरे सामने ऐसे ही मुस्कुराते हुये। वजह बेवजह ही होठों पर मुस्कान आ जाती है, इसकी भी सिर्फ वजह एक ही है मोहब्बत.. मैं मुस्कुराता रहा बेवजह ही तुम्हे देखकर, तेरा होना ही काफी है मेरे मुस्कुराने के लिए... बात निकली है तो फिर कुछ बात तो होगी, रह रह कर मुझे बस एक ही ख्वाब क्यों आता है...? सिर्फ तन ही नहीं मन भी स्वच्छ कीजिए, सम्मान पाना ही नहीं देना भी सीखिए। हर उम्र का अपना जीने का लहजा होता है, कभी मोहब्बत तो कभी भजन कीजिए...।। कुछ अलग थी बात कुछ अलग थी रात, कुछ लम्हे अलग थे कुछ अलग थी बरसात। निकल चले फिर हम भी तलाश में किसी, कुछ हम अलग थे तब, कुछ रास्ते अंजान थे। कुछ पहलु अनकहे ही रह जाएं तो अच्छा होता है, जीवन का हर किस्सा हर कोई नहीं समझता....।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is eve...

आओ कृष्णा फिर धरा पर

जाने कैसी हालत हो गई है भगवान, नवजात शिशु को डरा देख हूं मै हैरान, न स्कूल सुरक्षित ना घर सुरक्षित, समाज के हर कोने में बैठे हैं शैतान। रात की तो तुम बात ही छोड़ो, आज दिन में भी डर लगता है स्कूल से जब तक बच्चा घर ना आए, हर मां बाप चिंतीत रहता है।। क्या यही संस्कार मिल रहे है, आज घर घर में जन जन को, इंसानियत छोड़ चलो अब, अपनाओ तुम हैवानियत को। महिला हो या कोई पुरुष आज, सबके मन में डर बैठ रहा, मेरा बचपन जैसे बीता , मेरे बच्चे को क्यों वो नहीं मिल रहा।। आज देखता हूं मै अक्सर, रोज कोई बेटी प्रताड़ित हो रही, अपने हक को अपने घर में, देखो खुद जननी है रो रही। मुझे समझ आता है प्रभु, ये संकेत अब ठीक नहीं, अनेक रूपों वाली स्त्री है दुखी, ऐसी धरती की मुझे चाह नहीं। छोड़ चुका उम्मीद लगाना मै, अब समाज के इन ठेकेदारों से, मेरी आस बंधी है अभी तक, तेरे होने वाले इंसाफ से। आओ फिर से कृष्णा तुम धरा पर, द्रोपदी का फिर सम्मान बचाने छेड़ो एक और महाभारत फिर से, धरती से दुस्सासन हैं मिटाने।। Pari © ® Pari....  Love is life......Love is god....Love is everything

कुछ कल्पनायें

यूँ शरमा के तेरा झुकी नजरों से देखना मुझको, याद है आज भी वो अठखेलियाँ तेरी मुझको..!! मौसम ने करवट ली और मैने बालकॉनी में कुर्सी लगायी, शायद तुम्हें भी एहसास हुआ और तुम बाल सुखाने चली आयी...!! न जाने क्यों जिद थी बस तेरी मोहब्बत में जीने की, मालूम था मुझे जबकि पूरी नहीं होगी ख्वाइश ये भी.!! शायद ये सिलसिला खत्म नही होगा कभी मोहब्बत में भी, कि मोहब्बत होगी दोतरफा लेकिन इजहार नही होगा कहीं भी!! हरपल तुझे याद करता हूँ, हर वक़्त तेरे संग रहना चाहता हूँ, कभी कोई ऐसा लम्हा न आये मेरी जान, तू खफा हो और मैं मना न पाऊं!! ऐसा भी क्या गुरूर जनाब जो जमीं पर पैर न हों, वक्त बदल देता है सबके वक्त को वक्त के साथ। इश्क़ बेपनाह है लेकिन बेपरवाह तो नहीं, हर पल तुम्हे याद करना तेरा ख्याल करने से कम तो नहीं..? सब कहते हैं एक कदम तुम आगे आओ दो कदम हम आयेंगे, क्यों न एक कदम हम आगे आयें और उन्हें दो कदम बढ़ने का मौका दें.? राह में चलते चलते न जाने क्यों खो से गये हैं, शायद वाकिया याद आया होगा जो किस्सा बना था कभी.. कुछ दिनों के लिये हुआ जो तुमसे दूर, लगा जैसे किस्सा न बन जाऊं कहीं.. ...

बहुत हो चला अब सब्र

शब्द नही मिलते है कभी कभी, समझ नही आता कहाँ से शुरू करू, कलम भी मेरी रुक जाती है अक्सर, होती है जब इंसानियत शर्मसार। कैसे चुप रह जाऊं मैं भी आज, कैसे सिर्फ निंदा तक सीमित हो जाऊं, अभी ज़िंदा है जमीर मेरे अंदर, कैसे बहनों पर अत्यचार सह जाऊं। खुले घूम रहे भेड़िये अब भी, चुप बैठी है फिर क्यों सरकार, बना चुके कानून अगर तुम, फिर क्यों जिंदा हैं वो मक्कार। सिर्फ कहने भर को बात कही, या फिर उठेंगें कोई ठोस कदम, अभी बनाकर सब्र है हम भी, समय से कर दो अब इंसाफ।। देर लगी तो हम देर न करेंगे, फिर जो समझ आये वही करेंगे, चुप बैठे है कमजोर न समझना, हमको फिर लाचार न समझना। फिर होगा इंसाफ धरा पर, बीच सड़क पर फैसले होंगे, नहीं जरूरत कानून की रहेगी, भेड़िये फिर कफन में होंगें।। जाग उठो अब हिमालय के बीरो, उठा चलो फिर खड्ग हाथ मे, समय आ चला अब निर्णय का, गर्दन काटो महिसासुर की, नही तो धरती कांप उठेगी, भीषण इसमें ज्वार उठेगा। तांडव नृत्य फिर शिव करेंगे, काली दुर्गा संहार करेगी।। राग अलापना अब बंद करो, कयास लगाना बंद करो, छोड़ फ़िक्र अब सिर्फ अपनी, माँ बहनों के लिये घर से निकलो। नहीं जरूरत कान...

अटल धरा का अटल रत्न

बहुत ही ब्याकुल हूँ मैं आज, स्तब्ध निशब्द हूँ मैं आज, शब्दों से कीर्ति लिखी कभी, किया अनेकों बार गुणगान फिर भी खुद को बेबस जानकर, सोचता हूं कैसे करूँ तुम्हें प्रणाम, अंत हुआ है आज एक युग का, हे अटल तुम रहोगे सदा महान।। दृढ़ संकल्प था मन मे सदा, किये काम आपने बहुत महान, पोखरण हो या कारगिल युद्ध, देशहित मे करते थे काम। बसुधैव कुटम्ब को बना मूलमंत्र, फैराया दुनिया मे परचम, जन जन के मन मे थे आप, आज कर गए सबकी आंखे नम।। सत्ता मोह नही किया कभी, जिये हमेशा अटल नियम से, साथी संग विरोधी भी जिनको, मानते थे आदर्श हरदम। ऐसी हस्ती ऐसा व्यक्तित्व, नहीं मिलेगा आगे फिर से, अटल सत्य थे अटल ईरादे थे, तुम रहोगे दिलों में हरदम।। नहीं मिल रहे शब्द आज, कैसे लिखुँ महान सख्शियत को, नम आंखें है हाथ काँपते, नही कागज पर चलती है आज कलम। ऐसी क्षति हुई धरा पर, जिसका पूरा होना नहीं मुमकिन, आप अटल थे अटल रहोगे, अमर रहो हमारे भारतरत्न।। सादा जीवन निर्मल वाणी, मधुभाषी शब्दों के ज्ञानी, सरल था जीवन सदा ही उनका, हर इंसान को प्रेरणादायी। छोड़धरा को सदा के लिये, निकल चला देश का अनुयायी, श्रद्धा सुम...

स्वतंत्रता दिवस की महक

राह नहीं आसान थी वो, फिर भी खुद को तैयार किया, काँटों से पथ था भरा हुआ, फिर भी मुस्कुरा चलने का निर्णय किया। लेकर जान को हाथों में तब, देशहित को अपना कर्तव्य बना लिया, लाखों कुर्बानियो का फल था यारों, यूँही नही आजादी का पुष्प खिला।। लाखों जिंदगियो ने दाव था खेल, लगा हुआ था मौत का मेला, मिलनी थी आजादी जीत में, हार गये तो जान थी जानी। नही फिक्र अंजाम किये फिर, खेल सबने जी जान से खेला, किसी ने सुख चैन गवाया फिर, तो किसी ने गवा दी थी जवानी।। रात दिन का होश नही था, न फिक्र थी कोई जीवन जीने की, मिला हाथ फिर सब देशभक्तों ने, पाने आजादी की कसम थी खानी। नहीं था कोई धर्म का पहरा, बस राह पकड़ी थी अब देशधर्म की, तोड़ दीवारें रिस्ते नातों की, अब निकल पड़े सब स्वराज दिलाने।। न जाने कितनी माँगे सूनी हुयी, न जाने कितने बच्चे अनाथ हुये, पाने स्वराज को अपना यारो, न जाने कितने मा बाप बेसहारा हुये। जरा संभाल कर रखो इसे, बहुत ही महँगी मिली बिरासत, प्रेम भाईचारे संग रहो मिलजुल, कहीं खो न जाये ये सौगात जय हिन्द जय भारत Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is...