अटल धरा का अटल रत्न

बहुत ही ब्याकुल हूँ मैं आज, स्तब्ध निशब्द हूँ मैं आज,
शब्दों से कीर्ति लिखी कभी, किया अनेकों बार गुणगान
फिर भी खुद को बेबस जानकर, सोचता हूं कैसे करूँ तुम्हें प्रणाम,
अंत हुआ है आज एक युग का, हे अटल तुम रहोगे सदा महान।।

दृढ़ संकल्प था मन मे सदा, किये काम आपने बहुत महान,
पोखरण हो या कारगिल युद्ध, देशहित मे करते थे काम।
बसुधैव कुटम्ब को बना मूलमंत्र, फैराया दुनिया मे परचम,
जन जन के मन मे थे आप, आज कर गए सबकी आंखे नम।।

सत्ता मोह नही किया कभी, जिये हमेशा अटल नियम से,
साथी संग विरोधी भी जिनको, मानते थे आदर्श हरदम।
ऐसी हस्ती ऐसा व्यक्तित्व, नहीं मिलेगा आगे फिर से,
अटल सत्य थे अटल ईरादे थे, तुम रहोगे दिलों में हरदम।।

नहीं मिल रहे शब्द आज, कैसे लिखुँ महान सख्शियत को,
नम आंखें है हाथ काँपते, नही कागज पर चलती है आज कलम।
ऐसी क्षति हुई धरा पर, जिसका पूरा होना नहीं मुमकिन,
आप अटल थे अटल रहोगे, अमर रहो हमारे भारतरत्न।।

सादा जीवन निर्मल वाणी, मधुभाषी शब्दों के ज्ञानी,
सरल था जीवन सदा ही उनका, हर इंसान को प्रेरणादायी।
छोड़धरा को सदा के लिये, निकल चला देश का अनुयायी,
श्रद्धा सुमन अर्पित है तुमको, भारतरत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी।।

भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित श्रद्धा सुमन
🙏💐
Pari

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