आओ कृष्णा फिर धरा पर

जाने कैसी हालत हो गई है भगवान, नवजात शिशु को डरा देख हूं मै हैरान,
न स्कूल सुरक्षित ना घर सुरक्षित, समाज के हर कोने में बैठे हैं शैतान।
रात की तो तुम बात ही छोड़ो, आज दिन में भी डर लगता है
स्कूल से जब तक बच्चा घर ना आए, हर मां बाप चिंतीत रहता है।।

क्या यही संस्कार मिल रहे है, आज घर घर में जन जन को,
इंसानियत छोड़ चलो अब, अपनाओ तुम हैवानियत को।
महिला हो या कोई पुरुष आज, सबके मन में डर बैठ रहा,
मेरा बचपन जैसे बीता , मेरे बच्चे को क्यों वो नहीं मिल रहा।।

आज देखता हूं मै अक्सर, रोज कोई बेटी प्रताड़ित हो रही,
अपने हक को अपने घर में, देखो खुद जननी है रो रही।
मुझे समझ आता है प्रभु, ये संकेत अब ठीक नहीं,
अनेक रूपों वाली स्त्री है दुखी, ऐसी धरती की मुझे चाह नहीं।

छोड़ चुका उम्मीद लगाना मै, अब समाज के इन ठेकेदारों से,
मेरी आस बंधी है अभी तक, तेरे होने वाले इंसाफ से।
आओ फिर से कृष्णा तुम धरा पर, द्रोपदी का फिर सम्मान बचाने
छेड़ो एक और महाभारत फिर से, धरती से दुस्सासन हैं मिटाने।।
Pari

© ® Pari....


 Love is life......Love is god....Love is everything

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

कुछ कल्पनाओं के शहर

पहाड़ और पहाड़ी बचाओ

व्यथा आज पहाड़ की