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बहुत हो चला अब सब्र

शब्द नही मिलते है कभी कभी, समझ नही आता कहाँ से शुरू करू, कलम भी मेरी रुक जाती है अक्सर, होती है जब इंसानियत शर्मसार। कैसे चुप रह जाऊं मैं भी आज, कैसे सिर्फ निंदा तक सीमित हो जाऊं, अभी ज़िंदा है जमीर मेरे अंदर, कैसे बहनों पर अत्यचार सह जाऊं। खुले घूम रहे भेड़िये अब भी, चुप बैठी है फिर क्यों सरकार, बना चुके कानून अगर तुम, फिर क्यों जिंदा हैं वो मक्कार। सिर्फ कहने भर को बात कही, या फिर उठेंगें कोई ठोस कदम, अभी बनाकर सब्र है हम भी, समय से कर दो अब इंसाफ।। देर लगी तो हम देर न करेंगे, फिर जो समझ आये वही करेंगे, चुप बैठे है कमजोर न समझना, हमको फिर लाचार न समझना। फिर होगा इंसाफ धरा पर, बीच सड़क पर फैसले होंगे, नहीं जरूरत कानून की रहेगी, भेड़िये फिर कफन में होंगें।। जाग उठो अब हिमालय के बीरो, उठा चलो फिर खड्ग हाथ मे, समय आ चला अब निर्णय का, गर्दन काटो महिसासुर की, नही तो धरती कांप उठेगी, भीषण इसमें ज्वार उठेगा। तांडव नृत्य फिर शिव करेंगे, काली दुर्गा संहार करेगी।। राग अलापना अब बंद करो, कयास लगाना बंद करो, छोड़ फ़िक्र अब सिर्फ अपनी, माँ बहनों के लिये घर से निकलो। नहीं जरूरत कान...

अटल धरा का अटल रत्न

बहुत ही ब्याकुल हूँ मैं आज, स्तब्ध निशब्द हूँ मैं आज, शब्दों से कीर्ति लिखी कभी, किया अनेकों बार गुणगान फिर भी खुद को बेबस जानकर, सोचता हूं कैसे करूँ तुम्हें प्रणाम, अंत हुआ है आज एक युग का, हे अटल तुम रहोगे सदा महान।। दृढ़ संकल्प था मन मे सदा, किये काम आपने बहुत महान, पोखरण हो या कारगिल युद्ध, देशहित मे करते थे काम। बसुधैव कुटम्ब को बना मूलमंत्र, फैराया दुनिया मे परचम, जन जन के मन मे थे आप, आज कर गए सबकी आंखे नम।। सत्ता मोह नही किया कभी, जिये हमेशा अटल नियम से, साथी संग विरोधी भी जिनको, मानते थे आदर्श हरदम। ऐसी हस्ती ऐसा व्यक्तित्व, नहीं मिलेगा आगे फिर से, अटल सत्य थे अटल ईरादे थे, तुम रहोगे दिलों में हरदम।। नहीं मिल रहे शब्द आज, कैसे लिखुँ महान सख्शियत को, नम आंखें है हाथ काँपते, नही कागज पर चलती है आज कलम। ऐसी क्षति हुई धरा पर, जिसका पूरा होना नहीं मुमकिन, आप अटल थे अटल रहोगे, अमर रहो हमारे भारतरत्न।। सादा जीवन निर्मल वाणी, मधुभाषी शब्दों के ज्ञानी, सरल था जीवन सदा ही उनका, हर इंसान को प्रेरणादायी। छोड़धरा को सदा के लिये, निकल चला देश का अनुयायी, श्रद्धा सुम...

स्वतंत्रता दिवस की महक

राह नहीं आसान थी वो, फिर भी खुद को तैयार किया, काँटों से पथ था भरा हुआ, फिर भी मुस्कुरा चलने का निर्णय किया। लेकर जान को हाथों में तब, देशहित को अपना कर्तव्य बना लिया, लाखों कुर्बानियो का फल था यारों, यूँही नही आजादी का पुष्प खिला।। लाखों जिंदगियो ने दाव था खेल, लगा हुआ था मौत का मेला, मिलनी थी आजादी जीत में, हार गये तो जान थी जानी। नही फिक्र अंजाम किये फिर, खेल सबने जी जान से खेला, किसी ने सुख चैन गवाया फिर, तो किसी ने गवा दी थी जवानी।। रात दिन का होश नही था, न फिक्र थी कोई जीवन जीने की, मिला हाथ फिर सब देशभक्तों ने, पाने आजादी की कसम थी खानी। नहीं था कोई धर्म का पहरा, बस राह पकड़ी थी अब देशधर्म की, तोड़ दीवारें रिस्ते नातों की, अब निकल पड़े सब स्वराज दिलाने।। न जाने कितनी माँगे सूनी हुयी, न जाने कितने बच्चे अनाथ हुये, पाने स्वराज को अपना यारो, न जाने कितने मा बाप बेसहारा हुये। जरा संभाल कर रखो इसे, बहुत ही महँगी मिली बिरासत, प्रेम भाईचारे संग रहो मिलजुल, कहीं खो न जाये ये सौगात जय हिन्द जय भारत Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is...

सोच बदलें राष्ट्र बदलेगा

चलो एक नयी सोच पैदा करते हैं, सच को सच और झूठ को झूठ कहते हैं, अगर है कोई मुश्किल में पराया भी, मदद उसकी को आगे आते हैं। छोड़ तेरा मेरा आज से हम, बसुधैव कुटुंबकम का नारा सबको देते हैं छोड़ वो जाती धर्म की लड़ाई आज, चलो मिलकर इंसानियत के लिए लड़ते हैं।। सदियां बीती कुछ और फिर चले गये, कल हम भी अलविदा कह जायेंगे, सोच बदल तेरे मेरे की आज सभी, कल शायद इतिहास बना जाएंगे। राहें बदलो मंजिल बदलो मिलकर आज, फिर सवेरा कुछ अलग भी आएगा, आज संभल गए सोच समझ अगर, कल फिर भविष्य तेरे गुण गायेगा।। तू तू मैं मैं बहुत कर लिया अब तो आँखे खोलो तुम, जाती धर्म पर जो है लड़ाते फेंक निकालो उनको तुम। दोहरी सोच दोहरी मानसिकता से निकल बाहर जब आओगे, बेहतर कल बेहतर भविष्य नयी पीढ़ी को दे पाओगे।। छोड़ो आज से आंख बंद देश के दुश्मन पर भरोसा करना, आपस मे फिर लड़ा तुम्हे खुद की रोटी है इन्हें सेकना। तुम कट मर जाओगे फिर भी ये मौज में जीवन काटेंगे, और आज हो फिर कल ये हम सबको बस आपस में लड़वाएँगे।। फिर करलो मिलकर आज संकल्प सभी, जांच परख कर ही चुनना तुम कोई सरदार सही।। Pari ©   ® Pari.... Love is life....

एक संकल्प, नयी भोर की ओर

राह भटक कर देख लिया, गाँव छोड़ कर देख लिया, माँ बाप छोड़ कर शहर चला, घर बार छोड़ कर देख लिया। नाम कमाने मैं निकल पड़ा था, रात में नींद दिन का चैन छोड़ दिया, आज बरसों बाद एहसास हुआ है, इतना सब छोड़ मैंने क्या पा लिया।। किराये के कमरे में रहता हूँ, परिवार का चेहरा देखने को तरसता हूँ, कभी खाना खाता हूं यहाँ, तो कभी भूखे ही काम पर जाता हूँ। न पड़ोसी मुझे जानता है आज भी, न मैं अपनी दिनचर्या से खुश रहता हूँ, सोचा था जो बरसों पहले बड़ी समझ से, आज खुद की गलती पर रोता हूँ।। न होली मनती अपनो संग आज, न दीवाली पर दीप जलते हैं, आज रहकर सबसे दूर यारो, रिस्ते भी बस मतलव पर चलते हैं। जन्म हो या भले मृत्यु किसी की, सुखदुःख साझा करने का वक्त नही, रिश्तों में रह गया आज बस दिखावा, कोई जिये मरे आज किसी को फर्क नहीं।। निकल पड़े आज सभी एक साथ, शुरू हो रखी सबमें एक दौड़ नयी, कहने को सब दौड़ते साथ साथ, लेकिन एक दूसरे की तनिक भी फिक्र नही। जीना छोड़ दिया हँसना-रोना छोड़ दिया, खुद को मशीन जैसा बना लिया, शायद आज यही वो वजह है दोस्तो, जो कहती है यार मेरे पास वक्त नही।। आज एक सोच, एक समझ है आयी, जब वक्त नही...

विजय दिवस 26 जुलाई

कुछ सोच अलग सी होगी तुममें, कुछ मंसा मन मे घर की होगी, भूल सारी सुधबुद अपनी तुमने, जान यूहीं तो नही गवाही होगी। कैसा जूनून वो रहा होगा दिल मे, कैसे इरादे वो तुम्हारे होंगें, आयी जब वो घड़ी त्याग की, तुमने कदम आगे बढ़ाये होंगे।। नही फिक्र थी तुमको अपनी, नही जहन में कोई डर बाकी था, सामने दुश्मन देख मातृभूमि के, बस माटी का एक ख्याल बाकी था। न परवाह तुमको सर्द हवा की, न देखी तुमने तपती धूप कहीं, मिट गये तुम मातृभूमि पर तुमने कोई तब न आह भरी।। कोई अकेला था घर मे, कोई ठीक से अपनी उम्र जिया भी नही, कोई था नव पुष्प संजो रहा, कोई कर रहा कामना होली दीवाली की। फिर आया ऐसा झोंका शहादत का, सबने खेली फिर खून की होली, मातृभूमि पर आंच न आये आगे आये सब लगाने जान की बोली। चारो ओर से हो चाहे शत्रु अनेक, चाहे कर लो कोई षडयंत्र एक, सबका जवाब है तुम्हारे तरकश में, चाहे ले आओ बाण अनेक। सीना हरदम तना रहेगा इस मातृभूमि की रक्षा में, सांसो संग शीश भी दे देंगे हम काल को अपनी भिक्षा में। तुम्हे नमन है सदा हमारा, हरदम झुकते तुमपर शीश अनेक, मातृभूमि के बीर सपूतों मिले सदा हमें तुम्हारा आशीष। रह...

मेरी बात मेरा अंदाज

शब्दो का है ये खेल गजब, इसको खेलना जाने कोई कोई, कोशिश सबकी होती है, लेकिन लिखना जाने कोई कोई। कोई भावनाओ को शब्द है देता, कोई किसी का प्यार जताता, लेकिन कोई यादों को अपनी, कलम से कागज पर है उतारता। सबकी अपनी अलग कोशिश, सबके अपने अलग अंदाज, पढ़े जो कोई शब्द जो मेरे, बन जाये सबक बिगड़ा मिजाज। कुछ होती है कल्पनाएं किसी की, कुछ सच है पिरोया जाता, कलम है लिखती सिर्फ वही हमेशा, जो दिल मेरा उसे बताता। मैं भी जुड़ गया अब इससे, करता हूँ खुद से रोज सवाल, क्या मैं चाहता हूँ लिखना, कैसा होगा मेरे शब्दों का जाल। क्या कोई भावना होगी छिपी, या किसी का होगा मायाजाल, लेकिन लिखना जरा अदब से, हो न जाये कहीं कोई बबाल। उठा रखी है मैंने भी कलम, लिखने को कुछ अलग से आज, नहीं लिखुंगा झूठ कभी मैं, ना ही खोलूंगा किसी के कोई राज। हमेशा रखूंगा बस ख्याल एक ही, लिखुंगा सिर्फ अपने दिल की बात, थोड़ा pari की कल्पना होगी, और होगा थोड़ा pari के दिल का राज pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything