मेरी बात मेरा अंदाज

शब्दो का है ये खेल गजब, इसको खेलना जाने कोई कोई,
कोशिश सबकी होती है, लेकिन लिखना जाने कोई कोई।
कोई भावनाओ को शब्द है देता, कोई किसी का प्यार जताता,
लेकिन कोई यादों को अपनी, कलम से कागज पर है उतारता।

सबकी अपनी अलग कोशिश, सबके अपने अलग अंदाज,
पढ़े जो कोई शब्द जो मेरे, बन जाये सबक बिगड़ा मिजाज।
कुछ होती है कल्पनाएं किसी की, कुछ सच है पिरोया जाता,
कलम है लिखती सिर्फ वही हमेशा, जो दिल मेरा उसे बताता।

मैं भी जुड़ गया अब इससे, करता हूँ खुद से रोज सवाल,
क्या मैं चाहता हूँ लिखना, कैसा होगा मेरे शब्दों का जाल।
क्या कोई भावना होगी छिपी, या किसी का होगा मायाजाल,
लेकिन लिखना जरा अदब से, हो न जाये कहीं कोई बबाल।

उठा रखी है मैंने भी कलम, लिखने को कुछ अलग से आज,
नहीं लिखुंगा झूठ कभी मैं, ना ही खोलूंगा किसी के कोई राज।
हमेशा रखूंगा बस ख्याल एक ही, लिखुंगा सिर्फ अपने दिल की बात,
थोड़ा pari की कल्पना होगी, और होगा थोड़ा pari के दिल का राज
pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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