हर सजा मंजूर तेरी
क्या यार फिर से तूने वही बात करना शुरू कर दिया,
अगर मुलाकात न हुई अपनी तो मोहब्बत को नकार दिया।
माना कि कुछ गलत मै भी हो सकता हूं इनकार नहीं है,
लेकिन ऐसा भी क्या कि तूने पहचानने से मना कर दिया।
मेरी हर बात तुझे झूठी लगी, मेरी आंखो में सच्चाई न दिखी,
मैं था हर बार बेकसूर लेकिन तुझे बस मेरी गलती ही दिखी।
मेरा इरादा था हमेशा ही तुझे खुश रख सकूं ताउम्र मेरी जान,
लेकिन तूने तो मेरे में बस खामियां ही हर बार ही खोजी।
वो छोटी सी छोटी नोक झोंक भी जैसे कोई बबाल बन गया,
तेरी हर लापरवाही को नजरअंदाज हर बार ही मैने था किया।
जब जब तूने कुछ ख्वाइश की, सोच से पहले उसे मैने पूरा किया,
फिर भी इतनी परवाह के बाद तूने मुझे खुद से दूर ही तो किया।।
सच कहूं तो बस तेरे प्रेम के खातिर ही तेरे पास रह रहा हूँ,
हर बार ठुकरा दिया जाता हूं, फिर भी घूंट ये जहर पीए जा रहा हूँ।
न जाने कब तक लेकिन हां वादा है तुझसे जान है ये मेरी जब तक,
बस तुझी से मोहब्बत रहेगी, दिल में एक तेरी तस्वीर मिलेगी।।
Pari ✍️
Comments
Post a Comment