मौली माया मेरी

                मौली माया मेरी

वीन्की स्वाणी मुखड़ी देखी, ज्यू मयारू भी गौली ग्याई,
माया का मुच्छयालो मा फिर आग वीना पिलचाई।
मुलमुल हैसणो चुलचुल देखणो मन मेरो तब भरमाई
हैसदा ख्यालदा दिनु मा तड़तुडु घाम वीन लगायी।

कन छै कख छै क्या बतों, पर जिकुड़ी मा मेरा करकाई,
फिर बुनेकी जन तब वा कांडू सी जिकुड़ा चुभ ग्याई।
पूछी की नौ मेरु तब अपडु परिचय वीन बतायी,
फिर कब होली भेट बोली झणी व क्या क्या बोली ग्याई।।

स्वाणी व बांद मेरा दगड़ मेरी जिकुड़ी मा दगडी ऐ ग्याई,
यखुली मि वींका ही ख़्यालु मा ब्याली बटी खुयूँ छाई।
तबरी झल्ल वीन समणी ऐ की मि घंगतोल मा डाली,
मि भी रै ग्यों खौल्यु जन क्वी सुपन्यु आज सच ह्वाई।

मेरा ही गैल मेरा ही बाना वीन भी जन सारी दून्या भुलाई,
मेरा ही सुपन्या मेरी ही छविं मेरी ही बात कनी छाई,

राती खुणी राती बोल्दु छाई, अर दिन थै दिन मि समझदु छाई,
तेरी माया मा दिन-राती कु भेद भूले जाण, तेरी सौं मि कतै नि जणदु छाई।।
Pari
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