मेरा माल्टा की डाली

                    मेरा माल्टा की डाली

मेरा गौं की वा बात दिदो, मी भुलये नी भूलेन्दू वो साथ दिदो,
दादा की बणई चौकी तिबारी, वा चौका तिरवाल माल्टा डाली।
मेरा भैजी भुला दगड़यों दगड़, बोड़ा काकों कु ककड़ाट,
बोडी दादी कु वु प्यारु खिजेणु, काकी बौ जी की प्यार दुलार।

मीठी मीठी छविं बथा दगड्यो का गैल, खाणु माल्टा मा हैरु लूण,
खेलणु पिट्ठू, गुल्ली डंडा और बणाणु तिमला कु कथेलु दगड्यो का गैल।
वा लुका छुपी अर कंचा खेलूंणु अर छेडी छेडयूं मा लडै लड़णु,
कन भला दिन वो गैल्यो का गैल, वो चौका तिरवाल माल्टा की डाली।

इसकुल्या दगड्यो कु बिन्सर बटी इसकुला कु ना नुकुर करणु,
दादा-दादी कु मनाणु तब अर प्यार मा गुस्सा मांजी कु थचकाणु।
पुले पतेकी तब रूंदा रूंदा अर पिछने फरकी इसकुल जाणू,
गुरुजी की डैर का दगड़ इसकुल्या व मौज कौथिगु मा नचणु....

कख हरचि होला वु बचपन का दिन, वो मौज व मस्ती का दिन,
वु इतवार कु आणु अर सुबेर सुबेर उठी गोरु दगड़ जाणु,
वु कचबोली की बार अर दगड़ लिम्बा माल्टा अर लूण लीजाणु,
सर्या दिन की मस्ती अर मोल माटा म लपडे की तब घार आणु।
Pari

© ® Pari....


Love is life......Love is god....Love is everything...


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