किस्सा सच्चाई का

Jan 17, 2018

सालों साल की अच्छाई लग जाती है, तब जाकर कोई कृपा या फिर चमत्कार होता है, ऐसा ही कुछ हुआ था उस रोज भी...

बात तब की है जब लड़कियों का होना अच्छा माना जाता था, लेकिन खानदान के लिए वारिश भी तो जरूरी होता है, 5 बेटियां हो गयी सब खुश ही थे लेकिन नरेन्द्र को अपने वारिश की फिक्र होना लाजमी था...कभी किसी का बुरा नही किया...कभी किसी को बुरा नही कहा होगा...जब भी किसी ने मदद के लिए पुकारा तो कभी हाथ पीछे नही किया, ऐसी प्रतिभा भी इनकी...लेकिन दिनों दिन एक दिल मे टीस थी कि क्या मैने कोई पाप किया कभी, क्या मैने अनजाने में किसी को दुख दिया होगा....और ऐसे ही दिनों दिन सवाल खुद से करते नरेन्द्र...लेकिन ऐसा कोई वाकिया याद नही आया....लेकिन जो दिल मे चुभता था वो थी एक लड़के की ख्वाइश.....

क्रमश:.....

Jan 18, 2018

जैसा की वक्त के साथ सभी को अपनो की चाहत होती है और हर कोई यही चाहता है कि उसके साथ कोई मजबूत कंधा हो इसी ख्वाइश को लिए नरेन्द्र भी बेटे की चाहत किये जा रहे थे....

समय किसी के लिये रुकता नही है अपनी गति से आगे बढ़ता है, और नरेन्द्र की बेटियाँ उम्र की सीढ़ियां चढ़ने लगी और उनकी विवाह की चिंता भी नरेंद्र को सताने लगी थी.... एक बेटे की चिंता पहले से थी और साथ मे अब बेटियो की शादी की फिक्र...फिर भी नरेन्द्र के चेहरे पर कोई शिकन हो ऐसा नही हुआ...अन्दर ही अन्दर वो मयूश होते जा रहे रहे...

नरेन्द्र की पत्नी ने भी हार मान ली थी कि अब उनके अन्तिम समय के लिए कोई सेवा करने को नही होगा, बेटियां तो ससुराल चली जाती है..और हम बुढ़ापे में खुद को असहाय महसूस करेंगे..फिर भी समाज के सामने हमेशा ही एक मुस्कुराहट के साथ रहते थे दोनो.....

क्रमशः..

January 19, 2019

समय बितता गया और सभी परेशानियों संग नरेंद्र और उसका परिवार जीवन व्यतीत करने लगा..फिर नरेंद्र ने सोचा अपना सब कुछ भाई भतीजों के नाम कर दिया जाए और फिर यही बात होती चली...और यह सुनकर जहां कुछ लोग चिंतित थे और कुछ नरेंद्र के लिए चिंतित हो रहे थे...वहीं भाई लोग भी यही मान बैठे थे और यही सोच संबंध भी आपसी और अच्छे हो चले थे...

बेटियाँ स्कूल जाती और फिर उनके शादी ब्याह की बातें होना शुरू हो गया, समय भला कब किसी के लिए रुका जो अब रुकेगा....


January 21, 2017


आज फिर रोज की तरह सुबह हुयी और समय के साथ दिनचर्या शुरु...सब रोज जैसा चल रहा था और नरेंद्र भी रोजमर्रा के काम मे ब्यस्त थे.. दोपकर का समय रहा होगा, तभी उनके मामा के लड़के "सुनील"उनसे मिलने आये ...और फिर आज माहौल थोड़ा बदल गया, सभी उनके आवभगत में थे, कही साल के बाद मिलने जो आये थे..और भाई सब कैसा है, और मामा लोग भी सब अच्छे होंगे..सुनील ने हामी भर दी और साथ जोड़ा की मामा की तबियत थोड़ा उम्र के साथ ढीली सी रहती है..शाम का खाना तैयार था और आज तो माहौल दावत से बना हुआ था..और सब चिंता आज नही...नरेंद्र ने पूछा और सुनील जी बच्चे कैसे है?

सुनील: भाई बेटा इंटर में है और बेटी स्नातक कर रही, 1-2 जगह शादी के लिए बात चल रही....आपकी बेटियां भी तो बड़ी हो रही फिर आपने कही कोई बात...??

नरेंद्र:  समय बलवान होता है, जहां इनकी किस्मत होगी वही जाना है, बाकी कोशिश चल रही है...

सुनील: अच्छा जी!

 तभी खाना लग गया की आवाज आयी....

आए नरेंद्र ने जवाब में कहा... 

क्रमशः

January 22, 2018

इसी तरह कुछ दिन बीत गए और सुनील भी वापिस चल दिया...सब रोड तक छोड़ने गए और फिर आने का न्योता भी देने लगे...सुनील भी इतना प्यार पाकर काफी अच्छा महसूस कर रहा था, शायद उसने सोचा नही ऐसा प्यार मिल सकता है,..और गाड़ी आयी और सुनील चल दिया फिर आने का दिलाशा देकर....

फिर दिन लौट आये पहले से, कुछ दिन की मौज और चहल पहल के बाद सब पहले जैसा हो चला

January 24, 2018


इसी तरह कई दिनों तक दिनचर्या चलती रही और फिर नरेंद्र की बड़ी लड़की के लिए रिस्ता आया, और घर का महौल बदल गया..चर्चायें शुरू हो गयी अब सिर्फ रिस्ते के बारे में.. कैसा रहेगा, कैसा होगा और फिर बात होने लगी और जानकारी जुटाने लगे..

January 28, 2018

समय चलता रहा और फिर नरेन्द्र की बड़ी बेटी का रिश्ता तय हो गया और घर मे खुशियो का महौल बनने लग गया...मिठाई बाँटी गई और सब के चेहरे पर मुस्कान आ गयी...लेकिन नजिसकी शादी थी उसकी मनोदशा क्या होगी...थोड़ा सोचने वाली बात है।

January 31, 2018

मात्र 15 साल की उम्र में रिस्ता तय होना किसी अचरज से कम नही था...फिर भी असहज से होने के बाद भी उसने सब अच्छे से संभाला था...चलो जो भी घरवालो ने सोचा और समझा अच्छे के लिये किया होगा... और फिर समय के साथ रिस्ता बढ़ाया गया और सगाई कर दी गयी..साथ ही संगीत के साथ सब ने काफी मजा किया...

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