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बस यूहीं ख्याल में

न जाने कौन सी वो बात है, न जाने कौन से वो जज्बात है... किताब खुली फिर भी लब्ज चुप है, न जाने कौन सी ये शब्दावली है... एक पल भी गुजरा तो क्या, एक नया पल वो भी दे गया.... मैं समझने में गलती कर बैठा. वो तो इशारे भर में बहुत कुछ कह गया... बेजुबान सा था मैं सामने उसके, वो जैसे कोई ज्वालामुखी हो.. मेरी सारी कोशिश नाकाम रही... जैसे मैं कातिल वो वकील हो... न लब्ज चाहिए कहने को, बस निगाहें सब बयां कर जाती है.. जो देख लू तुझे मैं नजर भर को.. तेरी हर बात जैसे मुझे अपनी लगती है.. जुबां कुछ कह दे तो भुलाना मुमकीन है, मेरी कलम के शब्दों को मिटाना न मुमकिन है.. मैं कह भी दूं झूठ दुनियां से शायद कभी, तुझको झूठ लिखना मेरी कलम का नामुमकिन है.. Pari

तुझसे है मोहब्ब्त

 मैं लिखता रहा तुझे, जैसे कोई खिलता गुलाब, लेकिन पल पल लाती रही, तुम जीवन मे सैलाब। मैं करता रहता था तेरा इंतज़ार उसी मोड़ पर, तुम हरपल ही बदला करती थी, राह अपनी जनाब।। याद मुझे आज भी, रखे तेरे वो किताबों में गुलाब, रात रात भर जगना और खुली आँखों के वो ख्वाब। तेरी चाल निराली थी, होठों की वो भोली मुस्कान, हर अदा अनोखी थी और आंखें जैसे कोई शराब।। वो दिन ही थे मेरे सभी, आज मेरा न मेरा रहा, मैं हूँ खोया कहीं अब ऐसे, जैसे कोई वजूद न रहा। हरपल है अब बस तेरा, मुझमे मेरा न कुछ बाकी रहा, तू ही है मेरी रात और दिन, न कोई सूरज न चाँद अब रहा। तुझमें खोकर ही रहता हूं अब, जैसे मछली को पानी हो मिला, तेरी हर बात का है यकीं मुझे, न कोई तुझसे शिकवा और गिला। मोहब्बत में तेरी हूँ जलता दिया, बिन तेरे जैसे हो अँधेरा भरा, अब भी अगर मुझसे है तू खफा, फिर जहां में है क्या ही रखा.. Pari

कहानी अधूरी सी

एक किस्सा था जो कहानी बन न सका, अरमानों को जैसे पूरा होने का मौका न मिला। मोहब्बत बहुत थी उसको भी हमसे यकीनन, न बताने और न जताने का मौका मिल सका!! कोई दूर रहकर भी पास हो गया, न चाहकर भी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया। जब जब वो हुआ दूर मुझसे कभी, जैसे कस्तियों का कहीं साहिल खो गया.. कोई अपना है कहीं दूर किसी शहर में, ख्वाबों में आता है वो सुबह दोपहर में, हर किसी के नसीब में उस जैसा नहीं होता, वो तो मिलता है किसी किसी को ईश्वर की मेहर में... ©®Pari

रिश्ते निभा रहा हूँ...!!!

न जाने क्यों आज भी, खामोश ही जी रहा हूँ, हर आँसूं को बस यूहीं पिये जा रहा हूँ। इस सबको मेरी मजबूरी मत जान लेना, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। घुटन है साँसों में, रिश्ते-नाते टूट रहें हैं अहम की लड़ाई में, अपने छूट रहे हैं। फिर भी कोशिश सबको जोड़ने की कर रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। मेरी ख्वाईश मेरे सपनों की कोई कीमत नहीं अब, मेरा वजूद भी बस कहने भर को है अब। औरों की खुशी में बस अब खुशी ढूंढ़ रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। कट ही जायेगी ये जिंदगी अब यूहीं, ख्वाइशों को अपनी अब विराम दे रहा हूँ, कैसे बयाँ करूँ दिल की बेबसी को, मैं तो कांटों में भी बस मुस्कुरा रहा हूँ।। ज़िन्दा हूँ जब तक, ज़िम्मेदारी निभा रहा हूँ हर इल्जाम खामोशी से सहे जा रहा हूँ, जिन्दगी की कड़वाहट थोड़ी कम हो जाये, इसी कोशिश में आज भी गुड़ खा रहा हूँ।। अब मत कहना ये मैं क्या कर रहा हूँ, मैं तो बस खामोश, रिश्तों को निभा रहा हूँ।। Pari

मुझे भुला पाओगे क्या...?

मैं लिख भी दूँ अगर कहीं, कि दर्द होता है क्या, तुम उसे पढ़ने भर की हिम्मत जुटा पाओगे क्या..? महफ़िलें सजा भी दूँ कहीं मैं अगर, बैठने की उसमे हिम्मत तुम जुटा पाओगे क्या। तुम तो हो गैर हमेशा से ही मालूम है मुझे.. अपनेपन का एहसास दिला पाओगे क्या..?? छोड़कर जाओगे साथ मेरा तुम यकीनन फिर भी कुछ पल मेरे संग बिता पाओगे क्या..? मिलती है राहत बिता के फुरसत के पल तेरे संग, थोड़ी सी फुरसत आज भी निकाल पाओगे क्या..? मैं कर रहा महसूस तेरी कमी को आज बेइंतहा, इस कमी को तुम कभी मिटा पाओगे क्या...? तेरी यादों का सिलसिला है मेरे सीने में, भुला दूँ तुम्हें, कोई ऐसी दवा पिला जाओगे क्या...? मेरी कलम न लिखे तेरे बारे में कुछ भी, कोई ऐसा एहसान तुम कर जाओगे क्या..?? ©®Pari✍️

मेरी नाकामयाबी रिश्ते निभाने की

किसी की दुआ कबूल तो कोई मजबूर हुआ है, सोचा मुद्दतो बाद कोई पराया अपना हुआ है ख्वाइश तो थी तमाम खुशियाँ तुझपे लुटाने की, जितना प्यार किया तुझे तू उतना ही दूर मुझसे हुआ.. यक़ीनन मैं तेरे काबिल न था, ये तो जान लिया था मैंने, लेकिन फिर भी अनजान बन हर पल तेरे पास मैं रहा। मैंने कभी सोचा तक नहीं कि तुझसे दूर मैं जाऊं कभी, लाख कोशिशों के बाद भी तू मेरे करीब आज न हो सका।। दोष सिर्फ एक ही मेरा की मोहब्बत बेपनाह मैं करता हूँ, खुद की खुशी से पहले बस तेरी खुशी मैं खोजता हूँ। लेकिन तुम सही हो हर बार मेरा यही है मानना, क्योंकि कमियों के पिटारा मैं ही तो हूँ इस जग में।। एक आवाज पर तुमने सबको मेरे लिये छोड़ था दिया, ऐसा बलिदान जो मेरे लिए सबसे बड़ा था तुमने किया। मेरे हर अपने को अपना समझ गले था लगाया तुमने, औऱ मैं हार गया कोशिशों में, देने की खुशियां बेसुमार तुझे...!! Pari

मौका परस्त लोग जहाँ के

 मानवता का अंत नहीं तो और क्या हो सकता है मौतों की मंडी में भी क्या पैसों का व्यापार चलता है। मजबूरी में पड़े है मानव आज इस महामारी में, कुछ बहसी लगें है आज भी दलाली की तैयारी में।। फर्क नहीं पड़ता कि कोई मरता है या फिर जीता है, 10 रुपये का मास्क भी यहाँ 300 में बिकता है। जोड़ लिये है ढेरों पैसे, लाशों की तुमने दलाली में, लेकिन याद रखो जेब नहीं होती कफ़न की सिलाई में। कहीं ऑक्सीजन, कहीं एम्बुलैंस, कहीं बिस्तर बिक रहे, गरीबी की मार में कहीं लोग सड़कों में भी मर हैं रहे। आज का दिन कट गया, कल क्या मंज़र होगा पता नहीं, आशाओं के दीप जल रहे, जीवन दीपक का पता नहीं।। मेरी भी अभिलाषा है कि मेरा भी प्रयास बना रहे, मुश्किल की इस घड़ी में हर धरतीवासी टिका रहे। क्या अमीर क्या गरीब, मुश्किल घड़ी नहीं जानती है, इंसानियत बनी रहे बस, मुसिबत तो आती जाती है।। ©®Pari✍️