कहानी अधूरी सी

एक किस्सा था जो कहानी बन न सका,

अरमानों को जैसे पूरा होने का मौका न मिला।

मोहब्बत बहुत थी उसको भी हमसे यकीनन,

न बताने और न जताने का मौका मिल सका!!


कोई दूर रहकर भी पास हो गया,

न चाहकर भी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया।

जब जब वो हुआ दूर मुझसे कभी,

जैसे कस्तियों का कहीं साहिल खो गया..


कोई अपना है कहीं दूर किसी शहर में,

ख्वाबों में आता है वो सुबह दोपहर में,

हर किसी के नसीब में उस जैसा नहीं होता,

वो तो मिलता है किसी किसी को ईश्वर की मेहर में...

©®Pari

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