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ख्याल ख्याल में 14

यूहीं तन्हा सा महसूस होने लगा तुझसे दूर होकर, फिर मन बनाया और चल पड़ा तुझसे मुलाकात को मैं। युहीं तुम चुप्पी बनाये बैठे हो, शायद तुम्हे इसका अंजाम मालूम नहीँ, बयाँ करने से मिटते हैं गीले शिकवे, मौन रहकर सिर्फ दूरियां बढ़ती हैं। इश्क़ जो है तुमसे तो जैसे कोई गुनाह हो गया, हर बार तुम बेकसूर और मैं गुनहगार हो गया। इसी तरह तुम बस इजहारे मोहब्बत किया करो, लुट भी गये तेरे इश्क़ में तो शिकवा नही होगा। कुछ बात है होठों में दबी सी, आँखे जैसे करना चाहे कुछ बयाँ, नजाकत कुछ अलग सी अदाओं में, मिजाज फिर भी तेरा खुशनुमा.. दिन भले कैसे भी कट जाए, रातें बस तेरी यादों से दबी है, मुस्कान चेहरे पर ला देता है हर कोई, ये आंखें तो बस तेरी कमी से भरी हैं. मुस्कान जो चेहरे पर है, यकिनन तेरे ही ख्याल से है। यूँही तो तनहाई पसन्द नहीं, ये तो तेरे ख्यालों में खोने की चाह है। कुदरत के करिश्में से तुम आकर मेरे सामने बैठ गयी, फिर नजरें चुराकर तेरा देखना सारी दुनिया भुला गया। वो तेरी शराबी आँखे, घुंगराली लटायें, और गुलाबी गाल, संग मुस्कान होंठों की कर गयी अनेकों सवाल। नयनों की भाषा नयन ही जाने,...

मेरी कविता मेरे शब्द

मैं यूहीं तो शब्द संजोता नही था, शायद कोई किताब होना बाकी थी, वक्त बेवक्त कुछ लम्हें लिखता था, फिर यादें जो अताह बनानी थी। कुछ जज्बातों को उतारा है मैंने, कुछ को यूहीं भुलाना सही समझा, जो दे दिलो को सुकूँ संजो दिया, बेचैनी को बस स्वयं तक सीमित कर दिया। आये फिर लम्हें कुछ ऐसे भी, मन मेरा भी हुआ प्रफुल्लित, आशाओं का ज्वार उठा, देख मेरा मन हुआ प्रशनचित। कोई सुन्दर सा सपना फिर, मेरी भी निंद उड़ा गया, कुछ अच्छा लगा मुझे भी फिर ,जैसे जीवन का रुख गया। कुछ लम्हों को संजोने की कोशिश थी, कुछ अनचाहे लम्हें मिल गये, दिल की चाहत पूरी न हुयी, कुछ अपने न जाने कहाँ खो गये। बेकल ही होती है पूरी ख्वाहिशें, बाकी सब सपना ही बना रहता है, पल पल समय गुजरा जैसे रेत हाथों से, बस काश बाकी बचा रहता है। मेरी हर पंक्ति का हर शब्द मेरी कहानी होगा, ये जरूरी तो नही होगा, लेकिन मेरे अनुभव मेरी कल्पना को जरूर कविता का रूप देगा।। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything

ख्याल ख्याल में 13

शब्दों का प्रयोग किया जिसने, शब्दो की मर्यादा रखकर। इंसान वही है जीवित जग में, व्यंग्य करे जो अपनी मर्यादा में रहकर।। मेरी मासूमियत को मेरी कमजोरी समझ गए वो, वादा जीने मरने का कर यूहीं तनहा छोड़ गए वो। तोड़ दो खामोशियों का सिलसिला अब तुम भी, लो अब मान गये हम और हो चले अब तुम्हारे। खता होउसी शख्स को मेरे हिसाब से, दिल मे छुपे होंगे राज जिसके बेहिसाब से। चिलचिलाती धूप में भी आराम नही करता, दिन हो या रात भरसक प्रयास है करता। थोड़ा संभल कर शब्द चुनना यारो तुम, तुझे पालने को कोई हर कष्ट है सहता।। मैं लिखूं तुझे अपनी गजलों मे, या फिर तेरा जिक्र शायरी में हो मेरी। सब बेवजह का ही फलसफा होगा, अगर तेरा दिल न इससे वाकिफ होगा।। क्यों न जाने रह रहकर तुम मुझे याद आती हो, थोड़ा सुकूँ और बेचैनी बेहिसाब दे जाती हो। चोट मुझे जब लगे कभी, तो दर्द तुम्हीं महसूस करती हो। मेरी हर कामयाबी पर मुझसे ज्यादा, सिर्फ मेरी माँ तुम खुश होती हो।। कुछ खैरियत खुद की भी पूछ ले ऐ ज़िंदगी, बरसों से चली जा रही है तू, बिना कोई सवाल किये। हरे भरे खेतों कों कर बंजर, मैं सीमेंट में पौधे रोपने लगा हूँ,...

देशहित पहला कर्तव्य

अक्सर मैं भी मुस्कुरा देता हूँ, हालत खुद की देखकर, देशभक्त बन बैठे हैं कुछ आज, ईमान खुदका बेचकर। कृपा करना अपनी केशव, बचे रहे इंसानियत जहाँ में, मतभेद रखना आपस में पर, मनभेद का खेल न खेला जाये।। सत्ता के गलियारों का, स्वाद सभी को है भाता, लजीज बिरयानी खाने को, हर सयाना है यहाँ आता। गर्दन तक हो कीचङ में सने, फिर भी कुर्ता है चमकाता, लाखों करोड़ो चटकर जाता, और मजाल जो एक डकार हो आता। मैं ही सच्चा मैं ही काबिल, बस एक दौड़ है जैसे ओलम्पिक की, कुर्सी के लालच के खातिर, होड़ लगी है बस नींचपन की। कोई चोर तो कोई सिपाही, खुद को सर्वोपरि समझते हैं, लोकतंत्र के स्तंभ है जनता, वादों से निशदिन उसको भरमाते हैं।। लेकिन हमको क्या करना है, लड़ने दो नेताओ को, मुफ्त में कोई भीख जो दे दे, खा जाओ बस चुपकर के। देशहित से हमें क्या लेना है, अपना स्वार्थ सिद्द होना जरूरी है, धिक्कार है ऐसे लोगो पर , जिनके लिये देश ज्यादा चमचागिरी जरूरी है। ताज्जुब नहीं है कुछ भी, पढ़े लिखे तो ज्यादा अनपढ़ है, सच दिखता है सामने फिर भी, आँखों मीच हो रहे अंधे हैं। सही सोच और सही निर्णय अगर, लेने की तु...

ख्याल ख्याल में 12

कुछ हवा बदली सी लग रही है, कुछ खुश्बू आज हवाओं में हैं। आज फिर वही मौसम लगता है, मिले थे जब हम तुम पहली पहली बार। शब्द चुने थे तारीफ में तेरी, सबके सब खूबसूरत थे, दिदार किया फिर सबने तेरा, न जाने अब वो खो गए कहाँ। मुलाकातों का सिलसिला क्या कम हुआ तेरा मेरा, कुछ लोग समझने लगे हम दूर हो गये। फिर खोला मैंने दरवाजा दिल की खिड़की का, आज भी बस तेरे आने के इंतजार में। दोस्ती की ये बिरासत मिलती है सिर्फ खुशनसीबों को, बाकी क्या पाया क्या खोया हिसाब सभी लगाते है। ख़्वाइशों का सिलसिला है, कभी ये खत्म होगा नहीं, कोई मुझे पसंद नहीं, तो किसी को मैं इस जहाँ में। मैंने पूछ ही लिया उससे एक सवाल और आज, किस्मत में नही हो तो फिर दिल मे क्यों उतर गये? अलविदा भी बोल गये और मुड़मुड़ के भी देखते हो, मोहब्बत अगर बाकी है, तो रूक जाओ ना हमेशा के लिए। थोड़ी सी हंसी थोड़ी से नजाकत थोड़ी सी मासूमियत थोड़ी सी शरारत न जाने क्या क्या और कैसे किरदार है आपके, डर लगता है उफ्फ कहीं इश्क़ न हो जाये। मैंने सुना तुमने भी इस बार रंगों से दूरी बना ली, वजह पूछने पर तस्वीर मेरी दिखा डाली। कर लो शिकायत तुम...

रंगु कु त्योहार होली

फूलूँ मा फुलार आयी, डाल्यु मा मौल्यार छायी, आओ सभी दगड्यो, देखा होरी कु त्यौहार आयी। मेलु फुली फ्यूंली खिली, डांडयू मा बुराँस हैंसु, आओ मिली सभी दगड्यो, खिलला होरी दगडी ऐंसु... बसंत बयार आयी, खिलीन फूल बनी बनी का, मुखड्यूं मा मौल्यार आयी, माया की जन ऋतु ऐगे प्रेम का रंगु मा भीजिनि क्वी त, कै खुणी रैबार ल्याई, नखरयाली व बांद भी आज, मेरा रंग मा रंगी ग्याई। दगड्यों की टोली चली,  होरी का गीतू बीच, ढोल दमाऊं का दगड देखा, पंडों की रंगत अइँच। कभी बीरुं की बीर गाथा, त कभी प्रेम का गीत सजला, खुदेलु प्राण कैकु, क्वी मेरा आणा कु बाटु देखला।। अपणा बिरणा सभी आज गला भिटेइ जाला, बैर भूलि आज होरी का रंगू मा रंगेला। शान्ति अर प्रेम कु पर्व आवा सभी होली खेला, मन प्रसन्न कैकी आज बस रंगू मा रंगे जावा। होरी का रंग आज रंगला, आपसी द्वेष आज मिटॉला, रंग बिरंगा सभी ह्वे जौला, प्रेम कु पाठ सभु थै पढोला। आवा हे दीदी आवा हे भूलौ, ढोल की ताल मा सभी नचला, झट बौड़ी आवा शहर छोड़ि, प्रेम का गीत संग होली खिलला। Pari ©   ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everythi...

ख्याल ख्याल में 11

मैंने तो ज़िन्दगी की किताब खोल दी है तेरे सामने, अब तुम ही ढूँढ़ो अपनी मोहब्बत वाला पन्ना अब। आसान सी जान पडती है मेरी भी ज़िन्दगी दूर से, राह के काँटो को देखना मुमकीन नही सभी के लिए। मुस्कुराते चेहरे के लिए पीछे दर्द भी हो सकता है यारा, ये पहेली को बुझाये ऐसा कोई दिलदार न मिला प्यारा।। अक्सर निकला मैं भी तेरी चाह में खुद को छोड़ पीछे, मानी थी तेरी हर बात और चला तेरे संग यूँ ही आंख मीचे। सिलसिला आज भी अधूरा सा लगता है अपनी मोहब्बत का, आज भी जैसे वहीं हूँ मैं, जहाँ से शुरू हुयी थी कहानी हमारी। जोर जोर से शोर मचाये दिल मे छुपा हो जिसके चोर, शांत भाव से सत्य है चलता समय समय पर होती भोर। जरूरी तो नहीं कि हर बात सिर्फ शब्दो से कह दी जाये, चेहरे के भाव और आँखे भी कह जाती है बहुत कुछ अक्सर। रुक रुककर करवट बदल रहा है मौसम रोज, न जाने कौन वफा और कौन बेवफा हुये जा रहा है। आँख खुलते ही तेरा दिदार हो मेरा दिल चाहता है, तेरी मोहब्बत पर बस मेरा हक मेरा दिल चाहता है। चलो फिर चलते हैं साथ साथ कुछ पल जीवन राहों में, फैसला फिर बदलते है खुश रहने की चाहत का। सब्र से बढ़कर कोई तप ...