उसकी फिर वापसी इस दिल में

आज फिर जैसे वही लम्हे फिर लौट आए,
सालों बाद जब उसी आंगन में वो फिर शर्माए।
लगा जैसे आम का पेड़ फिर फल देने लग गया,
और वो पुराना पीपल फिर से हरा भरा हो गया।

कुछ तो बदला नहीं, ऐसा क्या हुआ आज की शाम में?
कुछ खास नहीं बस वो वापिस आ गई अपने गांव में।
उसकी वो चहकती मुस्कान, उसकी वो बातें निराली,
उसके लौट आने जैसे, सभी खेतों में आ गई हरियाली।।

वो सूना पनघट अब फिर से आबाद हो जायेगा
वो पुराना गांव का रास्ता फिर से रौनक पाएगा।
उसके आने से जैसे बाजार फिर सजने लग गया है,
उसकी एक झलक के बाद मेरा दिल खिल गया है।

आंखे उसकी जैसे सागर, जुल्फों में समाए जैसे काले बादल,
हर बार वो अलग सा दिखती है, खनके जब जब पांव की पायल,
होठों की मुस्कान तो ऐसे, बागों में खिलते लाखों फूल हो जैसे।
अब तुम ही बताओ ऐसी अदाओं से बचकर दूर जाएं तो कैसे।।

वो बातें उसकी मीठी मीठी, आज भी मिसरी खोल रही हैं,
वो आखिरी मुलाकात की कसक, फिर आज बोल रही है।
वो फिर न मिलने की कसम आज वो खुद तोड़ गई है,
जाते जाते फिर मिलने की नई एक आस छोड़ गईं है।।
Pari ✍️ 

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