धार और खाल रहस्य

जय देवभूमी जय उत्तराखंड

जैसा कि मैंने पूछा था उत्तराखंड में धार और खाल नामो के आगे लगाने का कारण क्या हो सकता है... कुछ जवाब मिले लेकिन सटीक कुछ नही जवाब आया..
पहले बात करते हैं धार की...जैसा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है और कहीं भी जाना हो तो पहाड़ी रास्तो से गुजरना पड़ता है जो कि पहाड़ की ऊपरी और निचली दोनों तरफ से हो कर निकलता है, पहाड़ के ऊपरी भाग को धार कहा जाता है और जो भी गाँव पहाड़ के ऊपरी भाग में स्थित होता है उस धार की वजह से उसके नाम के साथ धार जोड़ दिया जाता है....इसलिए अक्सर पहाड़ के ऊपर स्थित गाँव को धार से जाना जाता है....

अब करते है बात खाल की..शायद ज्यादातर को विदित होगा कि खाल क्या होता है...आज ही नही बल्कि बहुत सालों पहले से खाल का इस्तेमाल या कहें तो निर्माण पहाड़ों में होता रहा है...पहाड़ो में बारिश अधिक होती है और यहाँ पानी को जमा करने के लिये बड़े बड़े गड्डे बनाये जाते है और उनमें पानी का जमाव होता है और ये एक तो सिंचाई एवं पालतू एवं जंगली जानवरों के पानी के काम आते हैं और साथ ही जमीन में जलस्तर को बनाये रखने में मदद करते हैं और जहाँ जहाँ इन खालो का निर्माण हुआ और लंबे समय तक इस्तेमाल किया गया उन जगहों के नाम के अंत मे खाल शब्द जुड़ गया और ऐसे ही देवराजखाल आदि नाम पडे..


आजकल खालो का निर्माण होता है लेकिन उनका सही से रखरखाव नही होता इस वजह से ये कारगर सिद्द नही होते और अनेक जगह पहाड़ मे पानी संकट होना शुरू हो गया है। सजग हो और समय पर जाग जाएं ताकि पुरानी तकनीक का पुनः प्रयोग किया जाये और फिर से पहाड़ को समिर्द्ध बनाये और फिर कभी कहीं पानी का संकट पैदा न हो सके..।

प्रदीप पोखरियाल(pari)
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